मार्केटिंग — लोगों तक कैसे पहुँचें

वो रील जिसने सब बदल दिया

गुरुवार की शाम है। अंकिता देहरादून में अपनी छोटी सी किचन में पहाड़ी अचार का बैच बना रही है — वही रेसिपी जो उसकी नानी ने पौड़ी के पास एक गाँव में चालीस साल तक बनाई। फ़ोन निकालती है, एक जार के सामने टिका देती है, और 30 सेकंड्स की रील दर्ज करती है। कोई स्क्रिप्ट नहीं, कोई फ़ैंसी लाइटिंग नहीं। बस हाथ जो मसाले मिला रहे हैं, सरसों के तेल की छनक, और उसकी आवाज़: "मेरी नानी ने ये अपने परिवार के लिए 40 साल बनाया। अब मैं आपके लिए बनाती हूँ।"

रात 9 बजे इंस्टाग्राम पर पोस्ट करती है।

सुबह तक 12,000 व्इस्तेमाल। अगली शाम तक 50,000। फ़ोन बज-बजकर थक गया। दो दिन में 200 ऑर्डर्स — पिछले पूरे महीने से ज़्यादा।

अंकिता ने एडवरटाइज़िंग पर एक रुपया नहीं ख़र्च किया। बस एक कहानी बताई जिसे लोगों ने फ़ील किया।

अब दूसरी तरफ़ देखो।

रावत जी रानीखेत में शायद सबसे बढ़िया सेब उगाते हैं। उनकी रॉयल डिलीशस वैरायटी जिसने भी चखी, तारीफ़ की। लोकल लोग जानते हैं। रानीखेत मार्केट का फल वाला जानता है। लेकिन Delhi, Mumbai, Bangalore में किसी को पता ही नहीं कि ये सेब एग्ज़िस्ट करते हैं। हर सीज़न, हार्वेस्ट का ज़्यादातर हिस्सा हल्द्वानी के एक बिचौलिए को ₹40-50 पर किलो में बेच देते हैं। वही सेब मेट्रो सिटीज़ में ₹180-200 पर किलो में बिकते हैं।

अंकिता और रावत जी में फ़र्क़ उत्पाद गुणवत्ता का नहीं है। दोनों बहुत अच्छा बनाते हैं। फ़र्क़ ये है कि अंकिता ने लोगों को बताने का तरीक़ा ढूँढ लिया। रावत जी ने अभी तक नहीं।

यही मार्केटिंग है। आपके पास कुछ बढ़िया है और सही लोगों को इसके बारे में पता चले — इसके बीच का पुल।


मार्केटिंग vs सेल्स — फ़र्क़ क्या है?

लोग दोनों को एक ही समझते हैं। लेकिन ये अलग चीज़ें हैं।

सेल्स = वन-टू-वन। एक कन्वर्सेशन जिसमें आप एक इंसान को कन्विंस करते हैं कि ख़रीदे। भंडारी अंकल एक कॉन्ट्रैक्टर को बता रहे हैं कि कौन सा सीमेंट लें, गुणवत्ता का फ़र्क़ समझा रहे हैं, दाम नेगोशिएट कर रहे हैं, डील क्लोज़ कर रहे हैं — ये सेल्स है।

मार्केटिंग = वन-टू-मेनी। वो सब कुछ जो आप करते हैं ताकि ग्राहक पहले से इंटरेस्टेड होकर आपके पास आएँ। अंकिता की रील ने किसी एक को नहीं बेचा। हज़ारों लोगों में एक साथ अवेयरनेस और डिज़ायर क्रिएट की। उनमें से कइयों ने ख़ुद आकर ऑर्डर किया।

सेल्समार्केटिंग
डायरेक्शनआप ग्राहक के पास जाते हैंग्राहक आपके पास आता है
स्केलएक-एक करकेएक साथ बहुत सारे
एफ़र्टहर सेल में एफ़र्ट लगता हैअच्छी मार्केटिंग टाइम के साथ कम्पाउंड होती है
फ़ीलपुश — धकेलनापुल — खींचना
उदाहरणभंडारी अंकल कॉन्ट्रैक्टर को कन्विंस करते हुएअंकिता की वायरल रील से 200 ऑर्डर्स

दोनों बहुत ज़रूरी हैं। ज़्यादातर स्मॉल बिज़नेसेज़ सेल्स में ठीक-ठाक हैं। भंडारी अंकल डील क्लोज़ कर लेते हैं, पुष्पा दीदी चाय के साथ बिस्कुट बेच लेती हैं, रावत जी बायर से नेगोशिएट कर लेते हैं। लेकिन मार्केटिंग? बहुत कम लोग कर रहे हैं।

ये बहुत बड़ा मिस्ड अवसर है।

सीधी बात: बिना मार्केटिंग के सेल्स करना = हमेशा भागते रहो। बिना सेल्स के मार्केटिंग करना = अवेयरनेस तो बनी, ख़रीदा किसी ने नहीं। दोनों चाहिए। लेकिन अगर सिर्फ़ सेल्स कर रहे हो, तो थोड़ी सी मार्केटिंग ऐड करो — बिज़नेस ट्रांसफ़ॉर्म हो सकता है।


अपना मार्केट समझो — बेच किसको रहे हो?

मार्केटिंग पर एक रुपया ख़र्च करने से पहले — इंस्टाग्राम, पैम्फ़लेट, साइनबोर्ड — सब से पहले तीन सवालों के जवाब चाहिए:

1. ग्राहक कौन है?

"सब लोग" नहीं। कभी नहीं। Amul और Coca-Cola भी "सब लोगों" को नहीं बेचते। ख़ास बनो।

अंकिता का ग्राहक: अर्बन इंडियन, 25-40 एज। हेल्थ-कॉन्शस। डिस्पोज़ेबल आमदनी है। पहाड़ी खाने की नोस्टैल्जिया है या ऑथेंटिक रीजनल फ़्लेवर्स ट्राई करना चाहता है। ₹350 देने को तैयार है एक जार अचार के लिए जो जेनेरिक वर्ज़न ₹80 में मिलता है — क्योंकि गुणवत्ता, ऑथेंटिसिटी, और स्टोरी मायने रखती है।

पुष्पा दीदी का ग्राहक: ऋषिकेश आने वाले टूरिस्ट्स। त्रिवेणी घाट के पास से गुज़रते हुए। थके हुए, क्विक चाय चाहिए। तीर्थयात्री, योगा टूरिस्ट्स, फ़ॉरेन बैकपैकर्स — अलग-अलग हैं, लेकिन एक ही जगह पर हैं।

भंडारी अंकल का ग्राहक: लोकल कॉन्ट्रैक्टर्स जो घर बना रहे हैं। होमओनर्स जो रेनोवेशन करा रहे हैं। छोटे इलेक्ट्रीशियन्स और प्लम्बर्स। सब हल्द्वानी से 10-15 km के अंदर।

नीमा और ज्योति का ग्राहक: मुनस्यारी/बिनसर में ऑथेंटिक होमस्टे अनुभव ढूँढने वाले ट्रैवलर्स। टिपिकली अर्बन कपल्स या फ़ैमिलीज़। इंस्टाग्राम और ट्रैवल ब्लॉग्स पर एक्टिव। लग्ज़री नहीं, पर्सनल टच चाहिए।

देखो कितने अलग हैं? अंकिता के लिए जो मार्केटिंग काम करती है, भंडारी अंकल के लिए नहीं करेगी। मैसेज, चैनल, टाइमिंग — सब बदलता है।

2. ग्राहक कहाँ है?

फ़िज़िकल: पुष्पा दीदी के ग्राहक उनके स्टॉल के सामने से गुज़रते हैं। भंडारी अंकल के ग्राहक हल्द्वानी में हैं। इन बिज़नेसेज़ को लोकल विज़िबिलिटी चाहिए।

ऑनलाइन: अंकिता के ग्राहक इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर हैं। नीमा के गेस्ट्स गूगल सर्च और ट्रैवल ब्लॉग्स से आते हैं। इन बिज़नेसेज़ को डिजिटल प्रेज़ेंस चाहिए।

दोनों: विक्रम के फ़्रेंचाइज़ी के ग्राहक शॉप के सामने से भी गुज़रते हैं और Zomato/Swiggy पर भी सर्च करते हैं।

3. ग्राहक को क्या चाहिए?

यहाँ ज़्यादातर लोग ग़लती करते हैं। वो बताते हैं कि उनको क्या अच्छा लगता है (मेरा उत्पाद, मेरी गुणवत्ता) बजाय इसके कि ग्राहक को क्या चाहिए।

अंकिता के ग्राहक को कोल्ड-प्रेस्ड मस्टर्ड ऑइल से मतलब नहीं। उनको चाहिए कि अचार नानी के घर जैसा टेस्ट करे।

नीमा के गेस्ट्स को रूम की साइज़ से मतलब नहीं। उनको चाहिए कि सुबह उठें तो हिमालय दिखे और हाथ में गरम चाय हो

मार्केटिंग का नियम #1: ग्राहक क्या फ़ील करना चाहता है — वो बोलो। आप क्या बेचना चाहते हैं — वो मत बोलो।


4 Ps — आसान भाषा में

हर मार्केटिंग टेक्स्टबुक "4 Ps" सिखाती है। चलिए आसान करते हैं।

उत्पाद — आप दे क्या रहे हैं?

सिर्फ़ फ़िज़िकल चीज़ नहीं। पूरा अनुभव।

अंकिता पिकल नहीं बेचती। वो बेचती है "पहाड़ का स्वाद, नानी की रेसिपी, आपके दरवाज़े तक।" पिकल उत्पाद है। कहानी, पैकेजिंग, नोस्टैल्जिया — ये सब उत्पाद का हिस्सा है।

दाम — दाम कितना है, और ग्राहक को सेंस बनता है?

मूल्य निर्धारण चैप्टर में ब्योरा में कवर किया। मार्केटिंग के कॉन्टेक्स्ट में — दाम भी मैसेज देता है।

अंकिता की ब्रांडेड जार ₹350 = प्रीमियम, ऑथेंटिक, आर्टिज़नल। अगर ₹80 रखे तो लोग सोचेंगे सस्ता मास-प्रोड्यूस्ड पिकल है।

पुष्पा दीदी की ₹20 चाय = अफ़ोर्डेबल, नो-फ़स, सबके लिए।

कोई दाम ग़लत नहीं है। लेकिन दोनों अलग सिगनल भेजते हैं।

प्लेस — ग्राहक ख़रीदे कहाँ से?

पहले आसान था: दुकान। अब पेचीदा है।

  • भंडारी अंकल: फ़िज़िकल दुकान + शायद IndiaMART
  • अंकिता: इंस्टाग्राम शॉप + अपनी वेबसाइट + Amazon (D2C)
  • पुष्पा दीदी: त्रिवेणी घाट के पास फ़िज़िकल स्टॉल
  • विक्रम: फ़िज़िकल शॉप + Zomato + Swiggy + गूगल मैप्स
  • नीमा: Airbnb + Booking.com + गूगल + सीधा व्हाट्सऐप बुकिंग्स

सवाल: जहाँ-जहाँ ग्राहक आपको ढूँढता है, वहाँ आप मौजूद हैं? अगर कोई गूगल पर "hardware shop near Haldwani" सर्च करे, तो भंडारी अंकल दिखते हैं? (आगे बताएँगे कैसे — फ़्री में।)

प्रमोशन — लोगों को बता कैसे रहे हैं?

ज़्यादातर लोग सोचते हैं "मार्केटिंग" = प्रमोशन। लेकिन ये चार में से बस एक हिस्सा है। बिना सही उत्पाद, दाम, और प्लेस के प्रमोशन सिर्फ़ शोर है।

बाक़ी चैप्टर में प्रमोशन रणनीतिज़ कवर करेंगे जो स्मॉल बिज़नेसेज़ के लिए सच में काम करती हैं।


वर्ड ऑफ़ माउथ — अभी भी सबसे ताक़तवर

इंस्टाग्राम ऐड्स और गूगल रैंकिंग्स की दुनिया में, सबसे ताक़तवर मार्केटिंग चैनल अभी भी यही है — एक इंसान दूसरे को बोले: "यार, ये जगह ट्राई कर।"

नीमा और ज्योति ने मुनस्यारी में होमस्टे तीन साल पहले शुरू किया। कोई वेबसाइट नहीं, इंस्टाग्राम नहीं, कोई प्लेटफ़ॉर्म लिस्टिंग नहीं। पहले गेस्ट्स दोस्तों के दोस्त थे। उन्होंने अपने दोस्तों को बताया। किसी ने गूगल समीक्षा लिखा। फिर एक और। फिर एक ट्रैवल ब्लॉगर आई और लिखा। अब 60-70% बुकिंग्स सीधा रेफ़रल्स से आती हैं।

एडवरटाइज़िंग पर एक रुपया ख़र्च नहीं किया। एक भी नहीं।

वर्ड ऑफ़ माउथ इतना ताक़तवर क्यों है:

  1. ट्रस्ट: लोग दोस्तों की रेकमेंडेशन पर किसी भी ऐड से ज़्यादा भरोसा करते हैं
  2. फ़्री: बस अच्छी सेवा दो, बाक़ी अपने-आप है
  3. कम्पाउंडिंग: एक हैप्पी ग्राहक पाँच और लाता है, वो पाँच और लाते हैं
  4. टारगेटेड: लोग अपने जैसों को रेकमेंड करते हैं — तो नए ग्राहकों भी सही फ़िट होते हैं

वर्ड ऑफ़ माउथ कैसे बढ़ाएँ:

  • ऐसा अनुभव दो जिसकी बात हो। "ठीक-ठाक" सेवा कोई रेकमेंड नहीं करता। "भाई, ज़रूर जा" वाला अनुभव चाहिए।
  • सीधे बोलो। "अगर आपको अच्छा लगा, तो अपने दोस्तों को भी बताइए।" ज़्यादातर लोग ख़ुशी से बताते हैं — बस याद दिलाना पड़ता है।
  • आसान बनाओ। व्हाट्सऐप नम्बर दो, इंस्टाग्राम सँभालना दो, कार्ड दो जो शेयर कर सकें।
  • गूगल समीक्षाज़ माँगो। "क्या आप गूगल पर समीक्षा लिख सकते हैं? बहुत मदद होती है।" गूगल बिज़नेस पेज का QR कोड प्रिंट करो, काउंटर पर, गेस्ट रूम में, बिल पर लगाओ।

गूगल समीक्षाज़ और रेटिंग्स

इस चैप्टर से अगर एक ही चीज़ करो, तो ये करो: ग्राहकों से गूगल समीक्षाज़ लिखवाओ।

जब कोई सर्च करता है "chai near Triveni Ghat" या "hardware shop Haldwani" या "homestay Munsiyari" — गूगल बिज़नेसेज़ दिखाता है रेटिंग्स के साथ। 4.5 स्टार्स और 200 समीक्षाज़ वाली बिज़नेस को हमेशा प्रेफ़र किया जाएगा बनाम ज़ीरो समीक्षाज़ वाली।

फ़्री है। ताक़तवर है। और ज़्यादातर स्मॉल बिज़नेसेज़ इग्नोर करती हैं।

विक्रम के फ़्रेंचाइज़ी आउटलेट की Zomato ऑर्डर्स 30 पर डे से 55 हो गईं — सिर्फ़ रेटिंग 3.8 से 4.3 करने से। उसने हैप्पी ग्राहकों को पर्सनली फ़ॉलो-अप करके रेट करने को बोला। बस। कोई मार्केटिंग बजट नहीं।


डिजिटल मार्केटिंग — स्मॉल बिज़नेसेज़ के लिए

सोशल मीडिया एक्सपर्ट बनने की ज़रूरत नहीं। एजेंसी हायर करने की ज़रूरत नहीं। लेकिन 2025 में अगर बिज़नेस का ज़ीरो डिजिटल प्रेज़ेंस है, तो बहुत सारे पोटेंशियल ग्राहकों के लिए आप इनविज़िबल हैं।

प्रायोरिटी ऑर्डर में — क्या मायने रखता है:

1. गूगल बिज़नेस प्रोफ़ाइल — फ़्री, और ज़रूरी है

किसी भी लोकल बिज़नेस के लिए सबसे ज़रूरी डिजिटल चरण। जब कोई गूगल या गूगल मैप्स पर सर्च करता है, आपकी बिज़नेस दिखती है:

  • नाम, पता, फ़ोन नम्बर
  • टाइमिंग्स
  • फ़ोटोज़
  • समीक्षाज़ और रेटिंग्स
  • डायरेक्शन्स

कैसे सेट अप करें:

  1. फ़ोन या कम्प्यूटर पर business.google.com खोलो
  2. गूगल अकाउंट से साइन इन करो
  3. बिज़नेस नेम, श्रेणी, एड्रेस डालो
  4. वेरिफ़ाई करो (गूगल पोस्टकार्ड भेजता है या फ़ोन पर कॉल करता है)
  5. फ़ोटोज़, आवर्स, डिस्क्रिप्शन ऐड करो
  6. डन। 20 मिनट्स लगते हैं।

हर लोकल बिज़नेस को करना चाहिए — चाय शॉप, हार्डवेयर स्टोर, होमस्टे, सैलून, क्लीनिक, ढाबा — सबको।

पुष्पा दीदी के नेफ़्यू ने गूगल बिज़नेस प्रोफ़ाइल सेट अप कराया। एक महीने में टूरिस्ट्स "best chai near Triveni Ghat" सर्च करके आने लगे। रोज़ 5-10 नए ग्राहकों गूगल मैप्स से मिलने लगे। ख़र्चा: ₹0।

2. व्हाट्सऐप बिज़नेस — सबसे आसान CRM

अगर व्हाट्सऐप बिज़नेस (ग्रीन वाला जिस पर "B" बना है) इस्तेमाल नहीं कर रहे, तो आज स्विच करो। फ़्री है:

  • बिज़नेस प्रोफ़ाइल — एड्रेस, आवर्स, डिस्क्रिप्शन
  • कैटलॉग — उत्पाद की फ़ोटोज़ और दामेज़ अपलोड करो। ग्राहक ब्राउज़ कर सकता है
  • क्विक रिप्लाइज़ — आम FAQs के रेडी-मेड जवाब
  • लेबल्स — ग्राहकों ऑर्गेनाइज़ करो (न्यू, पेंडिंग पेमेंट, रेग्युलर)
  • ब्रॉडकास्ट लिस्ट्स — एक साथ बहुत लोगों को अपडेट भेजो (पर्सनल मैसेज की तरह आता है, ग्रुप नहीं)
  • स्टेटस अपडेट्स — इंस्टाग्राम स्टोरीज़ जैसा, व्हाट्सऐप पर। डेली स्पेशल्स, न्यू उत्पाद पोस्ट करो

अंकिता का 70% बिज़नेस व्हाट्सऐप से चलता है। अलग-अलग सिटीज़ के ब्रॉडकास्ट लिस्ट्स हैं। न्यू उत्पाद लॉन्च करती है तो व्हाट्सऐप ब्रॉडकास्ट भेजती है — फ़ोटो और ऑर्डर लिंक के साथ। एक मैसेज से टिपिकली 30-40 ऑर्डर्स आते हैं।

टिप: स्पैम मत करो। मंथ में 2-3 बार ब्रॉडकास्ट। हमेशा वैल्यू दो — कोई रेसिपी, टिप, या कहानी — साथ में सेल।

3. इंस्टाग्राम और फ़ेसबुक

इंस्टाग्राम — जिन बिज़नेसेज़ में विज़ुअल अपील है:

  • फ़ूड (अंकिता का अचार, विक्रम की फ़्रेंचाइज़ी आइटम्स)
  • हॉस्पिटैलिटी (नीमा की होमस्टे व्इस्तेमाल)
  • फ़ैशन, क्राफ़्ट्स, आर्ट
  • कोई भी D2C उत्पाद

फ़ेसबुक — अभी भी ताक़तवर:

  • लोकल बिज़नेसेज़ (लोकल फ़ेसबुक ग्रुप्स गोल्ड हैं)
  • ओल्डर डेमोग्राफ़िक्स
  • इवेंट्स प्रमोट करना
  • समुदाय बिल्डिंग

पोस्ट क्या करें:

  • बिहाइंड-द-सीन्स (अंकिता किचन में, रावत जी बग़ीचे में)
  • ग्राहक स्टोरीज़ और टेस्टिमोनियल्स
  • अपनी ऑरिजिन स्टोरी
  • अपने फ़ील्ड से रिलेटेड टिप्स
  • उत्पाद और पेशकश्स (लेकिन सिर्फ़ ये नहीं — 80/20 नियम: 80% वैल्यू, 20% सेलिंग)

कितनी बार: हफ़्ते में 3-4 बार काफ़ी है। निरंतरता > फ़्रीक्वेंसी।

4. यूट्यूब — लॉन्ग-फ़ॉर्म स्टोरीटेलिंग

रावत जी के बेटे ने रानीखेत में एप्पल फ़ार्मिंग पर यूट्यूब चैनल शुरू किया। आसान वीडियोज़ — पेड़ कैसे प्रून करते हैं, हार्वेस्ट कैसे होता है, सुबह बग़ीचे से सूर्योदय, सेब ग्रेड कैसे करते हैं। फ़ैंसी एडिटिंग नहीं।

चैनल पर 8,000 सब्सक्राइबर्स हैं। ज़्यादा ज़रूरी — सीधा इन्क्वायरीज़ आती हैं बायर्स से जो प्रीमियम एप्पल्स सीधे फ़ार्म से ख़रीदना चाहते हैं। एक वीडियो "A day in a Ranikhet apple orchard" को 90,000 व्इस्तेमाल मिले और तीन सिटीज़ से बल्क ऑर्डर्स आए।

5. Zomato/Swiggy — फ़ूड बिज़नेसेज़ के लिए

फ़ूड बेचते हो — रेस्टोरेंट, ढाबा, क्लाउड किचन, बेकरी — तो Zomato/Swiggy पर होना ज़रूरी है।

विक्रम की फ़्रेंचाइज़ी का 40% राजस्व ऑनलाइन डिलीवरी ऑर्डर्स से है। विदाउट दीज़ प्लेटफ़ॉर्म्स, वो 40% एग्ज़िस्ट ही नहीं करता।

टिप्स: अच्छी फ़ोटोज़ (इतने से ऑर्डर्स डबल हो सकते हैं), एक्यूरेट मेन्यू, फ़ास्ट प्रिपरेशन, नेगेटिव समीक्षाज़ को पोलाइटली सँभालो।

6. OLX/IndiaMART — B2B के लिए

बिज़नेसेज़ को बेचते हो (एंड कंज़्यूमर नहीं), तो IndiaMART पर लिस्ट करो। भंडारी अंकल उत्पाद लिस्ट करें तो रीजन भर से बल्क इन्क्वायरीज़ आ सकती हैं।


ऑफ़लाइन मार्केटिंग — जो अभी भी काम करती है

डिजिटल सब कुछ नहीं है। छोटे शहरों और रूरल इलाक़ाज़ में ट्रेडिशनल मार्केटिंग अभी भी नतीजे देती है।

साइनेज और बोर्ड्स

पुष्पा दीदी के स्टॉल पर सालों से कार्डबोर्ड पर हैंडरिटन साइन था। नेफ़्यू ने कलरफ़ुल मेन्यू बोर्ड बनवाया — ब्राइट येलो बैकग्राउंड, साफ़ टेक्स्ट हिंदी और इंग्लिश में, दामेज़ लिस्टेड, और एक लाइन: "2012 से यहीं चाय बनाती हूँ।" लोकल फ़्लेक्स शॉप से ₹800 में प्रिंट हुआ।

पहले हफ़्ते से वॉक-बाय टूरिस्ट्स का फ़ुटफ़ॉल नोटिसेबली बढ़ गया।

अच्छा साइनेज:

  • दूर से दिखे
  • बड़ा और साफ़ टेक्स्ट
  • क्या बेचते हैं — लिखो (अस्यूम मत करो लोग जानते हैं)
  • फ़ोन नम्बर हो
  • साफ़ और मेंटेंड हो (फटा-पुराना साइन = "मुझे अपने बिज़नेस की परवाह नहीं")

लोकल न्इस्तेमालपेपर ऐड्स

लोकल ऑडिएंस तक पहुँचने के लिए अभी भी इफ़ेक्टिव। अमर उजाला या दैनिक जागरण में छोटा क्लासिफ़ाइड ऐड — ₹500-2,000 में हज़ारों घरों तक पहुँचता है।

पैम्फ़लेट्स और विज़िटिंग कार्ड्स

ओल्ड-स्कूल लेकिन इफ़ेक्टिव। अच्छा विज़िटिंग कार्ड जो हर इंटरैक्शन में दो — ख़र्चा कुछ नहीं। रेज़िडेंशियल इलाक़ाज़ में पैम्फ़लेट्स — लोकल बिज़नेसेज़ के लिए फ़ुटफ़ॉल बढ़ता है।

लोकल इवेंट्स और मेले

उत्तराखंड में मेले, फ़ेयर्स, फ़ेस्टिवल्स — नंदा देवी राज जात से लेकर वीकली हाट्स तक। ये मार्केटिंग गोल्डमाइन्स हैं।

अंकिता हर साल Dehradun ऑटम फ़ेस्टिवल में जाती है। सीधे बेचती भी है और 200+ पोटेंशियल ग्राहकों के व्हाट्सऐप नम्बर्स कलेक्ट करती है। ये कॉन्टैक्ट्स पूरे साल की मेलिंग लिस्ट बन जाती है।

ऑटो-रिक्शा ब्रांडिंग

लोकल ऑटो पर बिज़नेस नेम, फ़ोन नम्बर, कैची लाइन — पूरा दिन शहर में घूमता रहता है। ₹2,000-5,000 वन-टाइम, महीनों चलता है।

भंडारी अंकल की डिलीवरी गाड़ी पर लिखा है: "भंडारी हार्डवेयर — हल्द्वानी — ₹5,000 से ऊपर फ़्री डिलीवरी।" सालों से ग्राहकों ला रही है।


कंटेंट मार्केटिंग — अपनी कहानी सुनाओ

लोग बिज़नेसेज़ से नहीं जुड़ते। कहानियों से जुड़ते हैं।

स्टोरी की ताक़त

अंकिता सिर्फ़ अचार नहीं बेचती। उसकी एक कहानी है: Delhi में सॉफ़्टवेयर इंजीनियर थी, IT जॉब छोड़ी, पहाड़ वापस आई, नानी की रेसिपीज़ दुनिया के लिए बनाने लगी।

ये कहानी कई काम करती है:

  1. याद रहती है। "IT छोड़कर पहाड़ी अचार बनाने वाली" — ये कोई नहीं भूलेगा।
  2. ट्रस्ट बनती है। बैकग्राउंड, मोटिवेशन, उत्पाद से कनेक्शन — सब पता है।
  3. लोग जुड़ जाते हैं। पालनअर्स को लगता है जर्नी का हिस्सा हैं, सिर्फ़ ख़रीदार नहीं।
  4. अलग बनाती है। पिकल ब्रांड्स हज़ारों हैं। अंकिता एक ही है।

क्या कंटेंट बनाएँ

बिहाइंड-द-सीन्स: लोग देखना चाहते हैं कैसे बनता है। अंकिता मसाले पीसने, तेल तैयार करने, माँ के बैच टेस्ट करने के वीडियोज़ पोस्ट करती है। रावत जी का बेटा हार्वेस्ट फ़िल्म करता है। नीमा होमस्टे से सनराइज़ शेयर करती है।

एजुकेशनल कंटेंट: प्रिया की एग्री-टेक ऐप छोटे फ़ार्मिंग टिप्स पोस्ट करती है — कब प्रून करें, मिट्टी कैसे टेस्ट करें। ट्रस्ट बनता है, एक्सपर्टीज़ एस्टेबलिश होती है।

ग्राहक स्टोरीज़: एक गेस्ट का टेस्टिमोनियल कि "नीमा की होमस्टे में घर जैसा लगा" — किसी भी ऐड से ताक़तवर है।

अपनी जर्नी: चुनौतियाँ, असफलता्स, छोटी-छोटी विन्स। लोग रियल इंसानों को सपोर्ट करते हैं।

अंकिता का टिप: "मैं हफ़्ते में 4 बार पोस्ट करती हूँ। एक उत्पाद पोस्ट, एक बिहाइंड-द-सीन्स, एक पहाड़ की कहानी, एक पर्सनल रिफ़्लेक्शन। पर्सनल रिफ़्लेक्शन्स को हमेशा सबसे ज़्यादा एंगेजमेंट मिलता है। लोग उनसे ख़रीदते हैं जिन्हें जानते हैं।"

पेशेवर होना ज़रूरी नहीं

DSLR कैमरा नहीं चाहिए। वीडियो एडिटिंग नहीं आनी चाहिए। बिल्कुल सही ग्रामर नहीं चाहिए।

चाहिए: फ़ोन, कहानी, और असली होने की हिम्मत।

अंकिता की सबसे वायरल रील ख़राब लाइटिंग में, बैकग्राउंड नॉइज़ के साथ फ़ोन पर बनी थी। रियल थी। लोगों को वो पसंद आई।


पेड एडवरटाइज़िंग बुनियादी्स

एक पॉइंट पर ऑर्गेनिक रीच (फ़्री कंटेंट) की लिमिट आती है। तब पेड एडवरटाइज़िंग मदद कर सकती है।

फ़ेसबुक/इंस्टाग्राम ऐड्स

सोशल मीडिया ऐड्स की ख़ूबसूरती — बहुत छोटे से शुरू कर सकते हो।

₹100 पर डे। बस। ₹3,000 पर मंथ में हज़ारों टारगेटेड लोगों तक पहुँच सकते हो।

टारगेटिंग में ताक़त है। ऐड दिखा सकते हो:

  • ख़ास सिटीज़ में (अंकिता Delhi, Mumbai, Bangalore टारगेट करती है)
  • ख़ास एज ग्रुप को (25-40)
  • ख़ास इंटरेस्ट्स वालों को (ऑर्गेनिक फ़ूड, हेल्थ, कुकिंग)
  • जो पहले इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल विज़िट कर चुके हैं

अंकिता ने दिवाली में ₹5,000 इंस्टाग्राम ऐड्स पर ख़र्च किए। मेट्रो सिटीज़ में 25-45 एज, फ़ूड और हेल्थ अकाउंट्स पालन करने वाली विमेन को टारगेट किया। ₹5,000 से ₹42,000 के ऑर्डर्स आए। 8x रिटर्न।

कब ऐड्स चलाएँ:

  • जब उत्पाद ऑर्गेनिकली बिक रहा हो (ऐड्स एम्प्लिफ़ाई करते हैं, फ़िक्स नहीं करते)
  • सीज़नल पुशेज़ के लिए (दिवाली, टूरिस्ट सीज़न)
  • न्यू उत्पाद लॉन्च पर
  • जब एग्ज़िस्टिंग ऑडिएंस से बाहर पहुँचना हो

कब ऐड्स पर पैसे मत ख़र्च करो:

  • उत्पाद/सेवा तैयार नहीं है
  • ज़्यादा ऑर्डर्स सँभालना नहीं कर सकते
  • ट्रैक नहीं कर सकते कि ऐड्स काम कर रहे हैं या नहीं
  • फ़्री चैनल्स ट्राई नहीं किए

गूगल ऐड्स — लोकल बिज़नेसेज़ के लिए

कोई Haldwani में "hardware shop near me" सर्च करे, तो गूगल ऊपर ऐड्स दिखाता है। ये गूगल ऐड्स हैं। क्लिक पर पे करते हो, डेली बजट सेट कर सकते हो (₹200/डे भी), जगह टारगेट कर सकते हो।

एडवरटाइज़िंग का गोल्डन नियम

जो मेज़र नहीं कर सकते, उस पर पैसे मत ख़र्चो। न्इस्तेमालपेपर ऐड में ख़ास फ़ोन नम्बर डालो ताकि पता चले कौन वहाँ से आया। इंस्टाग्राम ऐड्स पर ट्रैक करो कितने ऑर्डर्स आए। मेज़र नहीं कर सकते = सुधार नहीं कर सकते = शायद पैसे वेस्ट हो रहे हैं।


ब्रांडिंग बुनियादी्स — पेशेवर दिखना

ब्रांड क्या है?

ब्रांड लोगो नहीं है। ब्रांड वो फ़ीलिंग है जो लोगों को आपके बिज़नेस के बारे में सोचकर आती है।

"अंकिता का पहाड़ी अचार" सुनते ही: ऑथेंटिक, होममेड, प्रीमियम, ट्रस्टवर्दी। ये ब्रांड है।

"भंडारी हार्डवेयर" सुनते ही: रिलाएबल, 22 साल, सही दाम, ऑनेस्ट एडवाइस। ये भी ब्रांड है — बिना लोगो के।

लेकिन विज़ुअल आइडेंटिटी मदद करती है

शुरू में अंकिता प्लेन ग्लास जार्स में हैंडरिटन लेबल लगाकर बेचती थी। दाम ₹150। ग्राहकों को लगता "अच्छा होममेड पिकल है।"

फिर ₹15,000 लगाए ब्रांडिंग में — आसान लोगो, अच्छी लेबल डिज़ाइन, लगातार कलर स्कीम (अर्थी ग्रीन और ब्राउन), टैगलाइन: "From our pahad to your plate." वही पिकल। वही रेसिपी। वही जार।

दाम ₹350 कर दिया। सेल्स बढ़ गईं। ब्रांडेड जार पेशेवर लगी — प्रीमियम, क्यूरेटेड उत्पाद. गिफ़्ट कर सकते थे अब। प्लेन जार शेल्फ़ पर इनविज़िबल थी। ब्रांडेड जार कहानी बताती थी।

ज़्यादा ख़र्च करने की ज़रूरत नहीं

  • नाम: याद रहने वाला, बोलने में आसान। अगर हो सके तो हिंट करे कि क्या करते हैं या कहाँ से हैं।
  • लोगो: Canva पर फ़्री बना लो या Fiverr पर ₹500-2,000 में बनवा लो।
  • कलर्स: 2-3 कलर्स चुनो, हर जगह सेम इस्तेमाल करो — साइनबोर्ड, पैकेजिंग, सोशल मीडिया, विज़िटिंग कार्ड।
  • निरंतरता: यही असली की है। सेम नेम, सेम लोगो, सेम कलर्स — हर जगह। रेपिटिशन = रेकग्निशन।

पुष्पा दीदी की भी एक ब्रांड है: ब्राइट येलो बोर्ड, सिगनेचर एक्स्ट्रा-जिंजर चाय, फ़्रेंडली ग्रीटिंग। लोग इसे "ब्रांडिंग" नहीं बोलते, लेकिन यही है।


मार्केटिंग बिना बजट के

ज़्यादातर स्मॉल बिज़नेसेज़ के पास मार्केटिंग बजट नहीं होता। कोई बात नहीं। सबसे अच्छी मार्केटिंग अक्सर फ़्री होती है।

₹0 मार्केटिंग रणनीतिज़:

  1. गूगल बिज़नेस प्रोफ़ाइल — फ़्री, सोते-सोते ग्राहकों लाता है
  2. व्हाट्सऐप स्टेटस — रोज़ पोस्ट करो, सब कॉन्टैक्ट्स देखें
  3. हर हैप्पी ग्राहक से रेफ़रल और गूगल समीक्षा माँगो — फ़्री, हाई-असर
  4. इंस्टाग्राम/फ़ेसबुक पर लगातारली पोस्ट करो — फ़्री (बस टाइम लगता है)
  5. लोकल फ़ेसबुक और व्हाट्सऐप ग्रुप्स जॉइन करो — उपयोगी कंटेंट शेयर करो, स्पैम नहीं
  6. कॉम्प्लिमेंट्री बिज़नेसेज़ से कोलैबोरेट करो — नीमा ने काठगोदाम के ट्रैवल एजेंट से टाई-अप किया। वो होमस्टे रेकमेंड करता है, वो कैब सेवा। दोनों को फ़ायदा। ख़र्चा: ₹0।
  7. हर जगह बिज़नेस नेम, फ़ोन नम्बर, व्हाट्सऐप लिंक लगाओ — ईमेल सिगनेचर, व्हाट्सऐप प्रोफ़ाइल, गाड़ी

बार्टर और क्रॉस-प्रमोशन

छोटे शहरों में ये बहुत ताक़तवर है।

नीमा एक लोकल ट्रेक गाइड से बार्टर करती है — वो उसके क्लाइंट्स को एक रात होस्ट करती है, वो अपने सब ग्रुप्स में होमस्टे प्रमोट करता है।

अंकिता एक पहाड़ी हनी ब्रांड से कोलैबोरेट करती है — क्रॉस-प्रमोट करती हैं इंस्टाग्राम पर। दोनों की ऑडिएंस बढ़ती है, एक रुपया ख़र्च नहीं।

सोचो: कौन सा बिज़नेस तुम्हारे सेम ग्राहक को सर्व करता है लेकिन मुक़ाबला नहीं करता? वो तुम्हारा आइडियल क्रॉस-प्रमोशन साझेदार है।


ट्रैक करो — क्या काम कर रहा है

मार्केटिंग में सबसे बड़ा वेस्ट = जो काम नहीं कर रहा, वो करते रहो।

सबसे आसान ट्रैकिंग

हर नए ग्राहक से पूछो: "आपको हमारे बारे में कैसे पता चला?"

पुष्पा दीदी के नेफ़्यू ने एक महीने तक हर नए ग्राहक से यही पूछा:

  • 40% ने गूगल मैप्स पर ढूँढा
  • 30% को किसी ने रेकमेंड किया
  • 20% साइन देखकर रुके
  • 10% ने इंस्टाग्राम पर देखा

इससे पता चला: गूगल समीक्षाज़ पर ध्यान करो (फ़्री), साइनबोर्ड अच्छा रखो, इंस्टाग्राम में थोड़ा निवेश करो। और — ₹1,500/मंथ का न्इस्तेमालपेपर ऐड? किसी ने मेंशन नहीं किया। तुरंत बंद कर दिया।

ऑनलाइन ट्रैकिंग

डिजिटल मार्केटिंग के नम्बर्स आसानी से दिखते हैं:

  • इम्प्रेशन्स: कितने लोगों ने देखा
  • क्लिक्स: कितने ने क्लिक किया
  • कन्वर्ज़न्स: कितने ने ख़रीदा
  • लागत पर एक्विज़िशन: एक ग्राहक पाने में कितना ख़र्च हुआ

अंकिता हर संडे इंस्टाग्राम इनसाइट्स चेक करती है। रेसिपी रील्स को उत्पाद फ़ोटोज़ से 5x ज़्यादा व्इस्तेमाल मिलते हैं। तो ज़्यादा रेसिपी रील्स बनाती है। आसान।

बॉटम लाइन

₹5,000 ख़र्च करो, ₹20,000 आ रहे हैं — जारी रखो। ₹5,000 ख़र्च करो, पता नहीं काम कर रहा है या नहीं — मेज़र करने का तरीक़ा ढूँढो या बंद करो। ₹0 ख़र्च, ग्राहकों आ रहे हैं — और ज़्यादा करो।


आम मार्केटिंग ग़लतियाँ

1. "उत्पाद अच्छा है, लोग ख़ुद ढूँढ लेंगे"

नहीं ढूँढेंगे। रावत जी के सेब प्रूफ़ हैं। गुणवत्ता रिपीट ग्राहकों लाती है। मार्केटिंग पहला ग्राहक लाती है।

2. "सबको" बेचने की कोशिश

जब सबको बेचोगे, किसी तक नहीं पहुँचोगे। ख़ास बनो।

3. इननिरंतरता

दो हफ़्ते इंस्टाग्राम पर पोस्ट, फिर एक महीने ग़ायब, फिर शुरू। मार्केटिंग निरंतरता से काम करती है। रेग्युलरली दिखो।

4. सिर्फ़ उत्पाद की फ़ोटोज़

कोई सिर्फ़ उत्पाद फ़ोटोज़ का फ़ीड नहीं देखना चाहता। स्टोरीज़, टिप्स, बिहाइंड-द-सीन्स शेयर करो। 80/20 नियम: 80% वैल्यू, 20% सेलिंग।

5. नेगेटिव समीक्षाज़ इग्नोर करना

बुरा समीक्षा बुरा लगता है। लेकिन पोलाइटली रिस्पॉन्ड करो, इश्यू फ़िक्स करो — ट्रस्ट बनता है। लोग जानते हैं कोई बिल्कुल सही नहीं है। वो देख रहे हैं इम्परफ़ेक्शन कैसे सँभालते हो।

6. बड़ी कंपनीज़ को कॉपी करना

आप Zomato नहीं हो। मीम मार्केटिंग नहीं चाहिए। ₹10,000 करोड़ कंपनी के लिए जो काम करता है, ₹10 लाख बिज़नेस के लिए नहीं करेगा। रियल और पर्सनल रहो।

7. उत्पाद तैयार होने से पहले मार्केटिंग

खाना अच्छा नहीं है तो ज़्यादा ग्राहकों = ज़्यादा बैड समीक्षाज़, ज़्यादा राजस्व नहीं। पहले उत्पाद ठीक करो। फिर मार्केट करो।

8. ग्राहक डेटा कलेक्ट नहीं करना

हर ग्राहक जो ख़रीदे, उसका कॉन्टैक्ट बचाओ — व्हाट्सऐप नम्बर, इंस्टाग्राम सँभालना, ईमेल। अनुमति से। लिस्ट बनाओ — ये सबसे वैल्यूएबल मार्केटिंग एसेट है।


सब मिलाकर — रावत जी का मार्केटिंग प्लान

चलिए पूरा सर्कल कम्प्लीट करते हैं। रावत जी के पास बेहतरीन सेब हैं। मार्केट कैसे करें?

चरण 1: ग्राहक डिफ़ाइन करो। Delhi-NCR और मेट्रो सिटीज़ में हेल्थ-कॉन्शस फ़ैमिलीज़ जो प्रीमियम, फ़ार्म-फ़्रेश फ़्रूट चाहती हैं। गुणवत्ता और फ़्रेशनेस के लिए पे करने को तैयार।

चरण 2: गूगल बिज़नेस प्रोफ़ाइल। ऑर्चर्ड लिस्ट करो। फ़ोटोज़ डालो। विज़िटर्स से समीक्षाज़ लिखवाओ।

चरण 3: बेटा यूट्यूब वीडियोज़ बनाता रहे। ऑर्चर्ड ख़ूबसूरत है। कहानी कम्पेलिंग है। ट्रस्ट और रीच बनती जाएगी।

चरण 4: व्हाट्सऐप बिज़नेस अकाउंट। कैटलॉग बनाओ — एप्पल वैरायटीज़, दामेज़, बॉक्स विकल्प। ब्रॉडकास्ट लिस्ट शुरू करो।

चरण 5: इंस्टाग्राम प्रेज़ेंस। ऑर्चर्ड व्इस्तेमाल, हार्वेस्ट प्रक्रिया, फ़ैमिली स्टोरी पोस्ट करो। हैशटैग्स: #FarmToTable, #PahadiApples, #Ranikhet।

चरण 6: सीधा सेल्स बॉक्स सब्सक्रिप्शन। "रानीखेत रॉयल डिलीशस, 5 kg बॉक्स, हैंड-पिक्ड, 48 आवर्स में डिलीवरी। ₹600।" बिचौलिया ख़त्म।

चरण 7: कोलैबोरेट करो। अंकिता से साझेदारी — वो अपनी ऑडिएंस को सेब प्रमोट करे, वो उसके अचार सैम्पल्स एप्पल बॉक्सेज़ में रखें। दोनों विन.

चरण 8: मेज़र करो। ऑर्डर्स कहाँ से आ रहे हैं — ट्रैक करो। जो काम करे, और करो।

कुल मार्केटिंग बजट: लगभग ₹0। बस टाइम, एफ़र्ट, और स्मार्टफ़ोन।

रावत जी के बेटे ने पिछले सीज़न ये शुरू किया। दूसरे मंथ तक 50 बॉक्सेज़ पर वीक Delhi शिप हो रहे थे, ₹120/kg पर — बनाम बिचौलिए के ₹45/kg। वही सेब। वही फ़ार्म। अलग मार्केटिंग। पूरी तरह अलग आमदनी।


की टेकअवेज़

  1. मार्केटिंग विकल्पल नहीं है। बढ़िया उत्पाद बिना मार्केटिंग = सीक्रेट। और सीक्रेट्स से पैसे नहीं आते।
  2. ग्राहक को गहराई से जानो। बाक़ी सब यहीं से बनता है।
  3. वर्ड ऑफ़ माउथ सबसे ताक़तवर। अच्छा काम करके अर्न करो, माँगकर एनकरेज करो।
  4. गूगल बिज़नेस प्रोफ़ाइल फ़्री है और ज़रूरी है — हर लोकल बिज़नेस के लिए।
  5. व्हाट्सऐप बिज़नेस सबसे अच्छा दोस्त है — कैटलॉग, ब्रॉडकास्ट्स, स्टेटस अपडेट्स।
  6. अपनी कहानी सुनाओ। लोग उनसे ख़रीदते हैं जिन्हें जानते हैं।
  7. बड़ा बजट नहीं चाहिए। निरंतरता और ऑथेंटिसिटी चाहिए।
  8. ट्रैक करो क्या काम कर रहा है। जो नहीं कर रहा, बंद करो।
  9. ब्रांडिंग = निरंतरता, महँगा डिज़ाइन नहीं।
  10. आज शुरू करो। गूगल बिज़नेस प्रोफ़ाइल — 20 मिनट्स। रील दर्ज करो — 30 सेकंड्स। समीक्षा माँगो — एक सेंटेंस। शुरू करो।

अगले चैप्टर में ग्राहकों लाने से आगे — उन्हें अच्छे से सर्व करना रोज़। संचालन — वो सिस्टम्स, रूटीन्स, और प्रक्रियाेज़ जो बिज़नेस को स्मूदली चलाती हैं। पुष्पा दीदी रोज़ 100 कप्स चाय बनाती हैं, एक भी नहीं जलती। वो टैलेंट नहीं है — वो ऑपरेटिंग सिस्टम है। चलिए आपका बनाते हैं।