बैंकिंग और पैसों का लेन-देन

वो आदमी जिसके चार बैंक अकाउंट्स हैं

गुरुवार की सुबह है, हल्द्वानी में भंडारी अंकल की हार्डवेयर दुकान। कॉन्ट्रैक्टर दिनेश ने अभी ₹38,000 का सीमेंट और TMT बार्स अपनी पिकअप में लोड किया है। फ़ोन निकालता है।

"UPI कर देता हूँ, भंडारी जी।"

भंडारी अंकल रुकते हैं। "कौनसे अकाउंट में? SBI वाला या PNB वाला?"

दिनेश कन्फ़्इस्तेमाल्ड है। "आपके पास कितने अकाउंट्स हैं?"

भंडारी अंकल सिर हिलाते हैं। "चार। SBI में सेविंग्स — वो पुराना वाला, फ़ैमिली का। PNB में सेविंग्स — वो दुकान के लिए खोला था लेकिन सेविंग्स ही है। बैंक ऑफ़ बड़ौदा में करंट अकाउंट — वो CA ने बोला था तो खोल दिया। और एक जन धन वाला भी है कहीं। UPI तीन अकाउंट से लिंक्ड है। कभी पैसा इधर आता है, कभी उधर। मंथ एंड में समझ नहीं आता कितना कमाया, कितना ख़र्च हुआ।"

ड्रॉअर से एक क्रम्पल्ड प्रिंटआउट निकालते हैं — पिछले महीने का SBI स्टेटमेंट। 47 UPI ट्रांज़ैक्शन्स हैं, 3 NEFT क्रेडिट्स हैं, और एक दर्जन कैश डिपॉज़िट्स। आधी एंट्रीज़ पहचान ही नहीं आतीं।

"मेरा CA पागल हो जाता है," भंडारी अंकल मानते हैं।

अगर भंडारी अंकल की सिचुएशन फ़ैमिलियर लग रही है, तो अकेले नहीं हो। इंडिया में ज़्यादातर स्मॉल बिज़नेस ओनर्स का बैंकिंग से मेसी रिश्ता है। सालों में खुले हुए कई अकाउंट्स, UPI पेमेंट्स ग़लत अकाउंट में, पर्सनल और बिज़नेस का पैसा मिला-जुला, बैंक स्टेटमेंट्स जो किसी विदेशी भाषा जैसी लगती हैं।

ये चैप्टर इसे फ़िक्स करेगा। एक स्मॉल बिज़नेस ओनर को बैंकिंग के बारे में जो कुछ जानना चाहिए — सही अकाउंट चुनने से लेकर UPI, चेक्स, बैंक स्टेटमेंट पढ़ना, और वो ग़लतियाँ जो पैसे भी खाती हैं और CA का सिर भी दुखाती हैं।

बिज़नेस के लिए बैंकिंग क्यों ज़रूरी है

सोचोगे: "बैंक अकाउंट तो 18 साल से है। बैंकिंग तो आती है।"

लेकिन बैंक को एक पर्सन की तरह इस्तेमाल करना और बिज़नेस की तरह इस्तेमाल करना — दोनों में फ़र्क़ है:

1. पर्सनल और बिज़नेस पैसा अलग रखना। अगर बिज़नेस का पैसा और घर का पैसा एक ही अकाउंट में है, तो आप कभी नहीं जान पाओगे कि बिज़नेस में असली मुनाफ़ा कितना है। कभी नहीं। ये स्मॉल बिज़नेस ओनर्स की सबसे बड़ी फ़ाइनेंशियल ग़लती है।

2. लीगल कम्प्लायंस। बिज़नेस का टर्नओवर सर्टेन लिमिट क्रॉस करे तो करंट अकाउंट ज़रूरी है। सही रिकॉर्ड चाहिए। बैंक्स ये रिकॉर्ड अपने-आप देते हैं — बस सेटअप सही करो।

3. क्रेडिट हिस्ट्री बनना। कभी बिज़नेस लोन चाहिए? बैंक आपकी अकाउंट हिस्ट्री देखता है। एक अच्छे से बनाए रख्ड बिज़नेस अकाउंट में स्टेडी ट्रांज़ैक्शन्स = अच्छी क्रेडिट प्रोफ़ाइल। मेसी पर्सनल सेविंग्स अकाउंट से काम नहीं चलता।

4. टैक्स फ़ाइलिंग। CA को क्लीन रिकॉर्ड चाहिए। बैंक स्टेटमेंट ITR फ़ाइलिंग का प्राइमरी डॉक्यूमेंट है। अगर पर्सनल और बिज़नेस ट्रांज़ैक्शन्स मिक्स्ड हैं, तो अलग करना पेनफ़ुल और महँगा है।

5. ग्राहक ट्रस्ट। जब ग्राहक "M/s भंडारी हार्डवेयर" को पेमेंट करता है बजाय "रमेश भंडारी" के — पेशेवर लगता है। ट्रस्ट बनता है, ख़ासकर बड़े क्लाइंट्स और गवर्नमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स में।

बिज़नेस के लिए बैंक अकाउंट्स के टाइप्स

सेविंग्स अकाउंट

ये सबके पास होता है। आधार-PAN से खुलवाया था। बैलेंस पर 3-4% इंटरेस्ट मिलता है। महीने में लिमिटेड फ़्री ट्रांज़ैक्शन्स। आम तौर पर ₹1,000-5,000 मिनिमम बैलेंस रखना पड़ता है।

सेविंग्स अकाउंट से बिज़नेस चला सकते हैं?

टेक्निकली, बहुत छोटे बिज़नेस के लिए — हाँ। पुष्पा दीदी का चाय स्टॉल सेविंग्स अकाउंट से चलता है। महीने में ₹15,000-20,000 UPI पेमेंट्स आते हैं। बाक़ी कैश है। कोई उनके पीछे नहीं आएगा सेविंग्स अकाउंट इस्तेमाल करने के लिए।

लेकिन बात ये है: बैंक्स ऑफ़िशियली सेविंग्स अकाउंट्स में नियमित बिज़नेस ट्रांज़ैक्शन्स अलाउ नहीं करते। अगर बैंक को हाई-फ़्रीक्वेंसी बिज़नेस ट्रांज़ैक्शन्स दिखें — बहुत सारे अलग-अलग लोगों से UPI क्रेडिट्स, लार्ज डेली डिपॉज़िट्स — तो करंट अकाउंट में कन्वर्ट करने को बोल सकते हैं। कुछ बैंक्स ने सेविंग्स अकाउंट्स फ़्रीज़ भी किए हैं इस वजह से।

करंट अकाउंट

ये है असली बिज़नेस अकाउंट। फ़र्क़ देखो:

फ़ीचरसेविंग्स अकाउंटकरंट अकाउंट
कामपर्सनल सेविंग्सबिज़नेस ट्रांज़ैक्शन्स
इंटरेस्ट3-4% पर ईयरज़ीरो (इस्तेमालुअली)
ट्रांज़ैक्शन लिमिट्सलिमिटेड फ़्रीअनलिमिटेड
मिनिमम बैलेंस₹1,000-5,000₹5,000-25,000 (वेरीज़)
चेक बुकछोटा, बुनियादीफ़ुल बिज़नेस चेक बुक
ओवरड्राफ़्टनहीं मिलताअवेलेबल (अप्रूवल से)
अकाउंट नेमआपका पर्सनल नामबिज़नेस/फ़र्म का नाम
स्टेटमेंटबुनियादीडीटेल्ड, ऑडिट-रेडी

कब स्विच करना ज़रूरी है करंट अकाउंट पर?

  • एनुअल टर्नओवर ₹20 लाख (सेवाएँ) या ₹40 लाख (गुड्स) क्रॉस करे — क्योंकि GST रजिस्ट्रेशन लगेगा, और GST रिटर्न्स को करंट अकाउंट चाहिए
  • B2B क्लाइंट्स डील करें जो बिज़नेस नेम पर NEFT/RTGS से पे करना चाहें
  • बिज़नेस लोन या ओवरड्राफ़्ट फ़ैसिलिटी चाहिए
  • CA बोले तो — CA की सुनो

भंडारी अंकल के CA, मिश्रा जी (हल्द्वानी वाले), ने फ़ाइनली बिठाया: "भंडारी साहब, एक काम करो। SBI सेविंग्स — वो घर का अकाउंट है, वहाँ सिर्फ़ घर का पैसा। PNB सेविंग्स — बंद करो या घरवालों को दे दो। बैंक ऑफ़ बड़ौदा करंट अकाउंट — वो दुकान का अकाउंट है। सब बिज़नेस का पैसा वहाँ। UPI भी सिर्फ़ उसी से लिंक करो। जन धन वाला — वो सब्सिडी के लिए है, उसे छेड़ना मत।"

"लेकिन SBI में बहुत सारे ग्राहकों का UPI आ चुका है..."

"इसलिए बोल रहा हूँ — अब से सब करंट अकाउंट में। पुराना तो पुराना, अब आगे से ठीक करो।"

और भी अकाउंट टाइप्स जो जानने चाहिए

फ़िक्स्ड डिपॉज़िट (FD): पैसा एक फ़िक्स्ड पीरियड (3 महीने से 5 साल) के लिए लॉक करो, ज़्यादा इंटरेस्ट मिलता है (6-7.5%)। बिज़नेस का सरप्लस कैश पार्क करने के लिए अच्छा — जो कुछ महीने नहीं चाहिए। कुछ बिज़नेसेस 2-3 महीने का ऑपरेटिंग ख़र्चा FD में इमरजेंसी रिज़र्व रखते हैं।

रिकरिंग डिपॉज़िट (RD): हर महीने फ़िक्स्ड अमाउंट जमा करो। फ़्यूचर ख़र्चाेस के लिए रिज़र्व बनाने में अच्छा — टैक्स पेमेंट्स, एनुअल लाइसेंस रिन्यूअल, इक्विपमेंट रिप्लेसमेंट।

फ़्लेक्सी-डिपॉज़िट / स्वीप-इन अकाउंट: कुछ बैंक्स करंट अकाउंट्स पेशकश करते हैं जहाँ एक लिमिट से ज़्यादा बैलेंस अपने-आप FD में चला जाता है और इंटरेस्ट अर्न करता है। पैसा चाहिए तो वापस स्वीप हो जाता है। दोनों तरफ़ का फ़ायदा — अगर बैंक पेशकश करे।

बिज़नेस बैंक अकाउंट कैसे खोलें

कौन से डॉक्यूमेंट्स चाहिए

लिस्ट निर्भर करती है बिज़नेस टाइप पर, लेकिन आम तौर पर:

सोल प्रोप्राइटरशिप (ज़्यादातर दुकानें, स्टॉल्स, फ़्रीलांसर्स):

  • ओनर का PAN कार्ड
  • ओनर का आधार कार्ड
  • बिज़नेस एड्रेस प्रूफ़ (बिजली बिल, रेंट समझौता, या शॉप के संपत्ति पेपर्स)
  • GST रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट (अगर रजिस्टर्ड हैं)
  • उद्यम रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट (पहले MSME रजिस्ट्रेशन — ऑनलाइन फ़्री मिलता है)
  • शॉप & एस्टैब्लिशमेंट एक्ट रजिस्ट्रेशन (म्यूनिसिपल बॉडी से)
  • दो पासपोर्ट-साइज़ फ़ोटोज़
  • बिज़नेस लेटर या विज़िटिंग कार्ड (कुछ बैंक्स माँगते हैं)

साझेदारी फ़र्म:

  • ऊपर सब, प्लस:
  • साझेदारी डीड
  • फ़र्म का PAN कार्ड
  • सभी साझेदार का PAN और आधार

LLP या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी:

  • सर्टिफ़िकेट ऑफ़ इनकॉर्पोरेशन
  • कंपनी/LLP का PAN
  • MOA और AOA (कंपनी के लिए) / LLP समझौता
  • अकाउंट खोलने के लिए बोर्ड रेज़ोल्यूशन
  • सीधार्स/साझेदार का PAN और आधार
  • रजिस्टर्ड दफ़्तर एड्रेस प्रूफ़

नीमा और ज्योति का मुनस्यारी वाला होमस्टे दोनों की साझेदारी है। जब SBI ब्रांच में करंट अकाउंट खोलने गईं, ब्रांच प्रबंधक ने साझेदारी डीड माँगी। उनके पास नहीं थी — हैंडशेक समझौता पर चल रही थीं।

"वापस जाना पड़ा, पिथौरागढ़ में लॉयर से साझेदारी डीड बनवाई — ₹3,000 लगे — नोटराइज़ करवाई, फिर बैंक वापस गए," नीमा बताती हैं। "तीन ट्रिप्स, दो हफ़्ते। अगर पहले पता होता, तो पहले ही दिन रेडी होते।"

प्रो टिप: बैंक जाने से पहले ब्रांच को कॉल करो और उनकी ख़ास लिस्ट माँगो। एक ही बैंक की अलग-अलग ब्रांचेस कभी-कभी अलग डॉक्यूमेंट्स माँगती हैं। एक ट्रिप में सब पेपर्स लेकर जाना बेहतर है बजाय तीन ट्रिप्स के।

सही बैंक कैसे चुनें

ये फ़ैसला बहुत लोग हल्के में लेते हैं। ये फ़ैक्टर्स देखो:

1. ब्रांच कितना पास है। उत्तराखंड में स्मॉल बिज़नेस के लिए ये मेट्रो सिटी से ज़्यादा मायने रखता है। चेक डिपॉज़िट, कैश डिपॉज़िट, डॉक्यूमेंट्स, इश्इस्तेमाल — ब्रांच जाना पड़ता है। अगर नियरेस्ट ब्रांच 30 km दूर है, तो हर बैंकिंग काम आधे दिन का प्रोजेक्ट बन जाता है।

रावत जी का सेब का बग़ीचा रानीखेत के पास है। नियरेस्ट SBI ब्रांच मार्केट इलाक़ा में है, करीब 8 km। लेकिन नियरेस्ट प्राइवेट बैंक (ICICI, HDFC) अल्मोड़ा में — 50 km दूर। उनके लिए SBI ज़्यादा व्यावहारिक है, चाहे प्राइवेट बैंक की ऐप बेहतर हो।

2. डिजिटल बैंकिंग कैसी है। बैंक की मोबाइल ऐप कैसी है? बैलेंस चेक, स्टेटमेंट डाउनलोड, NEFT/RTGS, बेनिफ़िशियरीज़ मैनेज — सब फ़ोन से हो जाता है? आज के टाइम में ये बहुत मायने रखता है। SBI YONO काफ़ी सुधार हो गई है। HDFC, ICICI, कोटक की ऐप्स एक्सीलेंट हैं। कुछ कोऑपरेटिव और रीजनल रूरल बैंक्स में अभी भी डिजिटल बैंकिंग ठीक नहीं है।

3. बिज़नेस-फ़्रेंडली फ़ीचर्स। बैंक पेशकश करता है:

  • कैश डिपॉज़िट मशीन्स (CDMs) — शाम या बंद दिनों में भी कैश डिपॉज़िट?
  • बिज़नेस बैंकिंग मददलाइन?
  • हर ट्रांज़ैक्शन पर SMS/ईमेल अलर्ट्स?
  • ईज़ी चेक बुक रिक्वेस्ट?
  • Tally जैसे अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर से इंटीग्रेशन?

4. लोन और क्रेडिट फ़ैसिलिटीज़। अगर फ़्यूचर में बिज़नेस लोन, ओवरड्राफ़्ट, या CC (कैश क्रेडिट) चाहिए, तो उसी बैंक से लेना आसान है जहाँ पहले से करंट अकाउंट हेल्दी चल रहा हो। PSU बैंक्स (SBI, PNB, BOB) आम तौर पर MSME लोन्स के लिए आसान हैं। प्राइवेट बैंक्स प्रक्रियािंग में तेज़ हैं लेकिन डॉक्यूमेंटेशन पर स्ट्रिक्ट हो सकते हैं।

5. चार्जेस। तुलना करो:

  • मिनिमम बैलेंस रिक्वायरमेंट
  • चेक बुक चार्जेस
  • NEFT/RTGS चार्जेस (ज़्यादातर फ़्री हैं, लेकिन चेक करो)
  • कैश सँभालनािंग चार्जेस (बहुत ज़्यादा कैश डिपॉज़िट करो तो कुछ बैंक्स चार्ज करते हैं)
  • एनुअल अकाउंट बनाए रखेंस चार्जेस

ज़्यादातर उत्तराखंड स्मॉल बिज़नेसेस के लिए रिकमेंडेशन: प्राइमरी करंट अकाउंट PSU बैंक (SBI, PNB, या बैंक ऑफ़ बड़ौदा) में खोलो — जिसकी ब्रांच दुकान के पास हो। बेटर डिजिटल बैंकिंग चाहिए तो सेकेंडरी करंट अकाउंट प्राइवेट बैंक (HDFC, ICICI, कोटक) में खोलो ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन्स के लिए। लेकिन एक अकाउंट प्राइमरी रखो — जिससे CA काम करे, जो GST से लिंक्ड हो, जो इनवॉइसेस पर हो।

UPI, डिजिटल पेमेंट्स, और QR कोड्स

पुष्पा दीदी की डिजिटल जर्नी

दो साल पहले पुष्पा दीदी का ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट के पास चाय स्टॉल कैश-ओनली था। टूरिस्ट्स पूछते, "UPI है?" और वो मना कर देतीं। कुछ चले जाते। नेफ़्यू अर्जुन ने वीकेंड पर आकर 15 मिनट में PhonePe सेट अप कर दिया।

"अब 40% पेमेंट्स UPI से आते हैं," वो बताती हैं। "ख़ासकर टूरिस्ट्स और यंग क्राउड। कैश नहीं रखते। पहले ₹20 की चाय के लिए 'बदलाव नहीं है' का ड्रामा होता था। अब फ़ोन से आ जाता है — एग्ज़ैक्ट अमाउंट।"

फ़ोन काउंटर के पीछे रखती हैं, साउंड ऑन। जब भी पैसा आता है, PhonePe बोलता है, "₹20 रिसीव्ड।" स्क्रीन देखने की ज़रूरत नहीं। चाय बनाती रहो।

"सबसे अच्छी बात? कैश चोरी होने का डर नहीं। पहले रात को ड्रॉअर में ₹3,000-4,000 होता था। अब ज़्यादा पैसा सीधा बैंक में जाता है।"

UPI कैसे काम करता है (सिंपल वर्ज़न)

UPI (Unified Payments Interface) आपके बैंक अकाउंट को फ़ोन पर ऐप से कनेक्ट करता है। ग्राहक जब QR कोड स्कैन करे या UPI ID पर पैसा भेजे, पैसा सीधे उनके बैंक अकाउंट से आपके बैंक अकाउंट में जाता है। कोई बीच का आदमी नहीं। कोई वेटिंग नहीं। कोई चार्जेस नहीं (अभी के लिए — नीचे और बात करेंगे)।

UPI पेमेंट्स स्वीकार करने के लिए क्या चाहिए:

  1. इंटरनेट वाला स्मार्टफ़ोन
  2. बैंक अकाउंट
  3. UPI ऐप (PhonePe, Google Pay, Paytm, BHIM, या बैंक की अपनी ऐप)

पर्सनल UPI vs बिज़नेस UPI:

ये इम्पॉर्टेंट है और ज़्यादातर स्मॉल बिज़नेस ओनर्स को फ़र्क़ पता नहीं:

फ़ीचरपर्सनल UPIबिज़नेस UPI (मर्चेंट)
ट्रांज़ैक्शन लिमिट₹1 लाख पर ट्रांज़ैक्शन₹2 लाख पर ट्रांज़ैक्शन (कुछ बैंक्स ज़्यादा अलाउ करते हैं)
डेली लिमिट₹1 लाखहायर (बैंक पर निर्भर)
QR कोडपर्सनल QRब्रांडेड मर्चेंट QR, बिज़नेस नेम के साथ
सेटलमेंटइंस्टेंटइंस्टेंट या T+1 (अगला दिन) — प्रोवाइडर पर निर्भर
चार्जेसफ़्रीअभी फ़्री (₹2,000 से कम ट्रांज़ैक्शन्स के लिए — बदल सकता है)
रिपोर्टिंगबुनियादीडीटेल्ड ट्रांज़ैक्शन रिपोर्ट्स, डाउनलोडेबल
रिफ़ंड्समैनुअलप्लेटफ़ॉर्म से प्रक्रिया हो सकते हैं

बिज़नेस/मर्चेंट QR कोड कैसे लें:

  • बैंक से (पूछो "UPI मर्चेंट" या "बिज़नेस के लिए QR कोड")
  • पेमेंट एग्रीगेटर्स से — Paytm फ़ॉर बिज़नेस, PhonePe बिज़नेस, BharatPe, Pine Labs
  • BharatPe पॉपुलर है क्योंकि सब UPI ऐप्स से काम करता है — ग्राहक कोई भी ऐप इस्तेमाल करे, पैसा आपके अकाउंट में

भंडारी अंकल ने बिलिंग काउंटर पर BharatPe का QR कोड लगवाया। "सबसे अच्छी बात — सब ऐप्स से काम करता है। ग्राहक Google Pay इस्तेमाल करे, PhonePe करे, Paytm करे — मेरा एक QR कोड से सब काम। और BharatPe ऐप में पूरा रिपोर्ट मिलता है — कितने ट्रांज़ैक्शन्स हुए, कितना कुल, डेली/वीकली/मंथली।"

UPI टिप्स — बिज़नेस के लिए ज़रूरी

1. QR कोड दिखे और साफ़ हो। बिलिंग काउंटर पर लगाओ जहाँ ग्राहक आसानी से स्कैन कर सके। लैमिनेट करवाओ ताकि ख़राब न हो। स्क्रैच्ड या फ़ेडेड हो जाए तो तुरंत बदलो — बैड स्कैन = पेमेंट मिस।

2. पेमेंट वेरिफ़ाई करो। सिर्फ़ ग्राहक की स्क्रीन पर "पेमेंट सफल" मत देखो। अपना फ़ोन चेक करो कि क्रेडिट आया। फ़ेक पेमेंट स्क्रीनशॉट्स स्कैम है — रियल समस्या है।

3. इंस्टेंट नोटिफ़िकेशन्स ऑन रखो। UPI ऐप से पुश नोटिफ़िकेशन और SMS दोनों इनेबल करो। पुष्पा दीदी ऑडियो नोटिफ़िकेशन इस्तेमाल करती हैं — हर पेमेंट सुनाई देता है।

4. मंथली UPI रिपोर्ट डाउनलोड करो। ज़्यादातर ऐप्स CSV या PDF रिपोर्ट देते हैं। CA को दो। हर डिजिटल ट्रांज़ैक्शन का रिकॉर्ड है।

5. पर्सनल और बिज़नेस UPI अलग रखो। अगर हो सके तो एक फ़ोन बिज़नेस UPI (करंट अकाउंट से लिंक्ड) और दूसरा पर्सनल UPI (सेविंग्स अकाउंट से लिंक्ड)। दो फ़ोन व्यावहारिक नहीं तो कम से कम अलग ऐप्स इस्तेमाल करो — PhonePe बिज़नेस के लिए, Google Pay पर्सनल के लिए।

6. डेली रिकन्सिलिएशन। रोज़ शाम चेक करो: UPI पेमेंट्स जो आए, वो सेल्स रजिस्टर में मैच कर रहे हैं? 5 मिनट लगते हैं, बाद में बहुत हेडेक बचाते हैं।

NEFT, RTGS, IMPS — कब क्या इस्तेमाल करें

UPI के अलावा इंडिया में बैंक अकाउंट्स के बीच पैसा ट्रांसफ़र करने के तीन मेन तरीक़े हैं। बड़ी पेमेंट्स के लिए इनका इस्तेमाल होता है — आपूर्तिकर्ता को पेमेंट, B2B क्लाइंट्स से पैसा लेना, अपने ही अकाउंट्स के बीच ट्रांसफ़र।

फ़ीचरNEFTRTGSIMPS
पूरा नामनेशनल इलेक्ट्रॉनिक फ़ंड्स ट्रांसफ़ररियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंटइमीडिएट पेमेंट सेवा
स्पीडबैचेस में प्रक्रिया (30 मिनट-2 घंटे)रियल-टाइम (मिनट्स में)इंस्टेंट (24/7)
मिनिमम₹1₹2,00,000₹1
मैक्सिमम₹10 लाख (कुछ बैंक्स नेट बैंकिंग से ₹25 लाख)कोई अपर लिमिट नहीं₹5 लाख
कब अवेलेबल24/7 (दिसंबर 2019 से)वर्किंग डेज़, 7 AM-6 PM24/7, हॉलिडेज़ पर भी
चार्जेसफ़्री (जनवरी 2020 से, RBI मैंडेट)फ़्री (जुलाई 2019 से, RBI मैंडेट)₹2.50-25 (अमाउंट और बैंक पर निर्भर)
बेस्ट फ़ॉरनियमित पेमेंट्स — आपूर्तिकर्ता, तनख़्वाह, रेंटबड़ी पेमेंट्स (₹2 लाख से ऊपर)अर्जेंट ट्रांसफ़र्स — कभी भी, हॉलिडेज़/रात को भी

कब क्या इस्तेमाल करो:

  • आपूर्तिकर्ता को ₹45,000 स्टॉक ऑर्डर का पेमेंट? NEFT। फ़्री है, 1-2 घंटे में पहुँच जाएगा।
  • ₹3.5 लाख का बल्क सीमेंट ऑर्डर, तुरंत पुष्टि करना है? RTGS। रियल-टाइम है, बड़ी अमाउंट के लिए बना है।
  • संडे रात 9 बजे मददर को ₹15,000 भेजना है? IMPS। 24/7 काम करता है।
  • ग्राहक ₹28,000 का हार्डवेयर मटीरियल पे करना चाहता है? UPI से हो जाएगा। लेकिन B2B क्लाइंट बैंक ट्रांसफ़र प्रेफ़र करे तो NEFT।

रावत जी दिल्ली के डिस्ट्रीब्यूटर को एपल क्रेट्स बेचते हैं। डिस्ट्रीब्यूटर ₹2-4 लाख एक बार में पे करता है। "पहले चेक भेजता था — 3-4 दिन लगते थे साफ़ होने में। अब RTGS करता है। सुबह ऑर्डर पुष्टि, दोपहर तक पैसा अकाउंट में। मुझे नेक्स्ट कन्साइनमेंट की तैयारी करने में कोई टेंशन नहीं।"

NEFT/RTGS/IMPS के लिए क्या इन्फ़ॉर्मेशन चाहिए:

  • बेनिफ़िशियरी का पूरा नाम (बैंक रिकॉर्ड जैसा)
  • बैंक अकाउंट नंबर
  • बेनिफ़िशियरी ब्रांच का IFSC कोड
  • अकाउंट टाइप (सेविंग्स/करंट)

प्रो टिप: ज़्यादातर बैंक्स मोबाइल बैंकिंग से बेनिफ़िशियरीज़ ऐड करने देते हैं। नियमित आपूर्तिकर्ता और रेसिपिएंट्स को सेव्ड बेनिफ़िशियरीज़ में रखो — हर बार डीटेल्स भरने की ज़रूरत नहीं। लेकिन बड़ी ट्रांसफ़र से पहले अकाउंट नंबर डबल-चेक करो। एक ग़लत डिजिट = ग़लत पर्सन को पैसा, और वापस लाना नाइटमेयर है।

चेक प्रबंधन

UPI और NEFT के ज़माने में सोचोगे: "चेक्स अभी भी मायने रखते हैं?"

हाँ। ख़ासकर:

  • रेंट पेमेंट्स (बहुत से लैंडलॉर्ड्स चेक प्रेफ़र करते हैं)
  • गवर्नमेंट पेमेंट्स और कुछ टैक्स डिपॉज़िट्स
  • सिक्योरिटी डिपॉज़िट्स
  • बड़े B2B ट्रांज़ैक्शन्स जहाँ पेपर ट्रेल चाहिए
  • पोस्ट-डेटेड चेक्स पेमेंट गारंटी के तौर पर

चेक कैसे काम करता है

चेक आपके बैंक को एक रिटन इंस्ट्रक्शन है: "इस पर्सन को मेरे अकाउंट से ₹X दे दो।" रेसिपिएंट अपने बैंक में चेक डिपॉज़िट करता है, दोनों बैंक्स साफ़िंग सिस्टम से बात करते हैं, और 1-3 वर्किंग डेज़ में पैसा ट्रांसफ़र हो जाता है।

चेक के टाइप्स:

  • बेयरर चेक: जिसके हाथ में हो, एनकैश कर सकता है। जोखिमी। ज़रूरत न हो तो टालो।
  • ऑर्डर चेक / अकाउंट पेई चेक: सिर्फ़ चेक पर लिखे नेम वाले पर्सन के अकाउंट में जा सकता है। सेफ़। हमेशा "A/c Payee" लिखो या चेक पर दो पैरलल लाइन्स खींचो।
  • पोस्ट-डेटेड चेक (PDC): फ़्यूचर डेट का। उस डेट से पहले डिपॉज़िट नहीं हो सकता। पेमेंट गारंटी के तौर पर इस्तेमाल होता है — "मैं अगले महीने 15 तारीख़ को ₹50,000 दूँगा।"

पोस्ट-डेटेड चेक्स बिज़नेस में

भंडारी अंकल पोस्ट-डेटेड चेक्स नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं। "जब ₹2-3 लाख का स्टॉक ख़रीदता हूँ डिस्ट्रीब्यूटर से, तो कभी-कभी 2-3 पोस्ट-डेटेड चेक्स देता हूँ — एक 15 दिन का, एक 30 दिन का, एक 45 दिन का। डिस्ट्रीब्यूटर रखता है। जैसे-जैसे डेट आती है, चेक डिपॉज़िट करता है। इंस्टॉलमेंट प्लान जैसा — ट्रस्ट पर बेस्ड।"

"दूसरी तरफ़ भी — जब बड़े कॉन्ट्रैक्टर को ₹1 लाख क्रेडिट देता हूँ, तो उससे पोस्ट-डेटेड चेक लेता हूँ। अगर डेट तक कैश नहीं दिया, तो चेक डिपॉज़िट कर दूँगा। मेरा सेफ़्टी नेट है।"

चेक्स के ज़रूरी नियम:

  1. बाउंस्ड चेक गंभीर बात है। अगर चेक इश्यू किया और अकाउंट में उतने पैसे नहीं जब डिपॉज़िट हुआ, तो चेक "बाउंस" होता है। ये सिर्फ़ एम्बैरेसिंग नहीं — नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की Section 138 के तहत बाउंस्ड चेक क्रिमिनल ऑफ़ेंस है। फ़ाइन और जेल भी हो सकती है। कभी चेक इश्यू मत करो अगर श्योर नहीं हो कि डेट पर अकाउंट में पैसे होंगे।

  2. हिसाब रखो। चेक रजिस्टर बनाए रख करो — एक सिंपल नोटबुक या स्प्रेडशीट: चेक नंबर, डेट, किसको, किस अमाउंट का, कब साफ़ हुआ। रिसीव्ड चेक्स का भी ऐसे ही।

  3. चेक वैलिडिटी। चेक 3 महीने वैलिड है डेट लिखने से। उसके बाद "स्टेल" हो जाता है, बैंक स्वीकार नहीं करेगा। ग्राहक का पुराना चेक पड़ा है तो एक्सपायर होने से पहले डिपॉज़िट करो या फ़्रेश चेक माँगो।

  4. स्टॉप पेमेंट। चेक इश्यू कर दिया लेकिन कैंसल करना है (डिपॉज़िट होने से पहले)? बैंक को "स्टॉप पेमेंट" इंस्ट्रक्शन दो उस चेक नंबर पर। ₹50-100 फ़ी लगती है।

बैंक स्टेटमेंट्स और रिकन्सिलिएशन

बैंक स्टेटमेंट कैसे पढ़ें

बैंक स्टेटमेंट आपके अकाउंट की हर ट्रांज़ैक्शन का रिकॉर्ड है — एक पीरियड के लिए। बैंक की ऐप या नेट बैंकिंग से PDF या एक्सेल में डाउनलोड कर सकते हो।

टिपिकल बैंक स्टेटमेंट में ये कॉलम्स होते हैं:

डेटडिस्क्रिप्शन/नैरेशनचेक/रेफ़रेंस नं.डेबिट (पैसा गया)क्रेडिट (पैसा आया)बैलेंस
01 अप्रैलUPI/PhonePe/दिनेश...UPI12345638,000.001,85,000.00
01 अप्रैलNEFT-श्री सीमेंट लिमिटेडNEFT7890122,15,000.00-30,000.00
02 अप्रैलकैश डिपॉज़िट50,000.0020,000.00
02 अप्रैलUPI/GPay/राजेश...UPI34567812,500.0032,500.00

बैंक स्टेटमेंट्स में आम एब्रीवीएशन्स:

  • UPI — UPI पेमेंट (सेंडर/रिसीवर और रेफ़रेंस दिखता है)
  • NEFT/RTGS/IMPS — बैंक ट्रांसफ़र्स
  • CHQ DEP या CLG — चेक डिपॉज़िटेड/साफ़िंग
  • ATM WDL — ATM से कैश निकाला
  • INT — इंटरेस्ट क्रेडिट/डेबिट
  • EMI — लोन इंस्टॉलमेंट कटा
  • CHRGS या SC — बैंक ने सेवा चार्जेस काटे
  • GST — बैंकिंग सेवाएँ पर GST

बैंक रिकन्सिलिएशन — अपने रिकॉर्ड को बैंक से मैच करना

ये सबसे ज़रूरी हैबिट्स में से है बिज़नेस ओनर के लिए, और सबसे ज़्यादा इग्नोर होती है।

बैंक रिकन्सिलिएशन क्या है?

अपने रिकॉर्ड (कैश बुक, सेल्स रजिस्टर, ख़र्चा रजिस्टर) को बैंक स्टेटमेंट से तुलना करना — मैच हो रहा है या नहीं। जहाँ मैच नहीं, वहाँ ढूँढो कि क्यों।

मिसमैच क्यों होता है?

  • चेक डिपॉज़िट किया लेकिन साफ़ नहीं हुआ (आपके रिकॉर्ड में आमदनी है, बैंक में अभी क्रेडिट नहीं)
  • चेक इश्यू किया लेकिन रेसिपिएंट ने डिपॉज़िट नहीं किया (आपके रिकॉर्ड में ख़र्चा है, बैंक में डेबिट नहीं)
  • बैंक चार्जेस जो रिकॉर्ड नहीं किए
  • ऑटो-डेबिट भूल गए (लोन EMI, इंश्योरेंस प्रीमियम)
  • UPI पेमेंट नाकाम हो गया लेकिन ग्राहक को लगता है हो गया
  • डुप्लिकेट पेमेंट
  • त्रुटि — आपकी या बैंक की

अंकिता हर संडे शाम बैंक रिकन्सिलिएशन करती हैं। "पहले नहीं करती थी — मंथ एंड पर CA को सब दे देती थी। एक बार ₹18,000 का UPI पेमेंट एक ग्राहक से डबल चार्ज हो गया। ग्राहक ने कम्प्लेंट की तब पता चला। बैंक ने रिफ़ंड किया लेकिन 10 दिन लगे। तब से हर वीक चेक करती हूँ।"

बुनियादी बैंक रिकन्सिलिएशन कैसे करें:

  1. बैंक स्टेटमेंट डाउनलोड करो — PDF और एक्सेल दोनों (एक्सेल में काम करना आसान है)
  2. अपने रिकॉर्ड खोलो — सेल्स रजिस्टर, ख़र्चा रजिस्टर, या अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर
  3. बैंक की हर ट्रांज़ैक्शन अपने रिकॉर्ड से मैच करो — टिक लगाते जाओ
  4. अनमैच्ड आइटम्स मार्क करो — बैंक स्टेटमेंट में है लेकिन रिकॉर्ड में नहीं, या रिकॉर्ड में है लेकिन बैंक में नहीं
  5. हर मिसमैच निवेशिगेट करो — टाइमिंग डिफ़रेंस (चेक साफ़ नहीं हुआ), भूला हुआ ख़र्चा (बैंक चार्जेस), या असली त्रुटि?
  6. रिकॉर्ड अपडेट करो जहाँ ज़रूरत हो

50-100 ट्रांज़ैक्शन्स पर मंथ वाले स्मॉल बिज़नेस के लिए ये 30-60 मिनट मंथली लगता है। हर मिनट वर्थ है।

प्रो टिप: Tally, Zoho Books, या Khatabook इस्तेमाल करते हो तो बैंक स्टेटमेंट इम्पोर्ट करके ऑटो-मैच कर सकते हो। काम आधा हो जाता है।

बिज़नेस के लिए क्रेडिट और डेबिट कार्ड्स

बिज़नेस डेबिट कार्ड

करंट अकाउंट खोलते वक़्त डेबिट कार्ड मिलता है। पर्सनल डेबिट कार्ड जैसा ही — ATM से कैश निकालो, परचेज़ेस करो — लेकिन बिज़नेस अकाउंट से लिंक्ड है।

इस्तेमालेस:

  • शॉप्स से सप्लाइज़ ख़रीदना जो कार्ड्स स्वीकार करती हैं
  • ऑनलाइन परचेज़ेस — प्रिंटर इंक, स्टेशनरी, कूरियर बुकिंग्स
  • कैश विड्रॉल जब किसी को कैश देना हो

टिप: बिज़नेस डेबिट कार्ड पर डेली विड्रॉल और स्पेंडिंग लिमिट सेट करो। कार्ड खो जाए या चोरी हो तो सुरक्षा। ज़्यादातर बैंक्स ऐप से लिमिट्स एडजस्ट करने देते हैं।

बिज़नेस क्रेडिट कार्ड

बिज़नेस क्रेडिट कार्ड पर्सनल क्रेडिट कार्ड से अलग है। क्रेडिट लिमिट बिज़नेस की फ़ाइनेंशियल हेल्थ पर बेस्ड होती है, और सब ख़र्चाेस बिज़नेस ख़र्चाेस हैं — अकाउंटिंग क्लीनर होती है।

फ़ायदाेस:

  • इंटरेस्ट-फ़्री क्रेडिट पीरियड: इस्तेमालुअली 20-45 दिन। 5 तारीख़ को ₹30,000 का सप्लाइज़ ख़रीदो, अगले महीने 25 तारीख़ तक बिल पे करो — 50 दिन पैसा इस्तेमाल किया बिना इंटरेस्ट। फ़्री शॉर्ट-टर्म फ़ाइनेंसिंग।
  • ख़र्चा ट्रैकिंग: मंथली क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट = बिज़नेस ख़र्चाेस की रेडी लिस्ट।
  • इनाम और कैशबैक: कुछ बिज़नेस क्रेडिट कार्ड्स 1-2% कैशबैक देते हैं, फ़्यूल सरचार्ज वेवर्स, इनाम पॉइंट्स। ₹1 लाख मंथली स्पेंडिंग पर ₹1,000-2,000 बचत।
  • क्रेडिट हिस्ट्री बनाना: नियमित, ऑन-टाइम क्रेडिट कार्ड पेमेंट्स बिज़नेस का CIBIL स्कोर सुधार करते हैं। लोन लागू करते वक़्त काम आता है।

डेंजर्स:

  • अनपेड बैलेंस पर भारी इंटरेस्ट: फ़ुल अमाउंट टाइम पर न भरो तो क्रेडिट कार्ड्स 2.5-3.5% पर मंथ चार्ज करते हैं — मतलब 30-42% पर ईयर। क्रेडिट कार्ड पर कभी बैलेंस कैरी मत करो। कभी नहीं।
  • ओवरस्पेंड का टेम्प्टेशन: ₹2 लाख क्रेडिट लिमिट = ₹2 लाख हैं — ऐसा नहीं। मतलब बैंक ₹2 लाख उधार देने को तैयार है ब्रूटल इंटरेस्ट रेट्स पर अगर टाइम पर पे नहीं किया।

विक्रम HDFC बिज़नेस क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करता है फ़्रेंचाइज़ी ख़र्चाेस के लिए — रॉ मटीरियल्स, पैकेजिंग, इक्विपमेंट रिपेयर्स। "सब कार्ड पर डालता हूँ, ड्यू डेट से पहले फ़ुल अमाउंट पे करता हूँ। 45 दिन का फ़्री क्रेडिट मिलता है, क्लीन ख़र्चा रिकॉर्ड, और महीने में करीब ₹1,500 इनाम। नियम सिंपल है — अगर फ़ुल बिल पे नहीं कर सकता, तो कार्ड स्वाइप नहीं करूँगा।"

बिज़नेस लोन्स बुनियादी्स

फ़ंडिंग चैप्टर में डीटेल में कवर करेंगे। लेकिन बैंकिंग की बात हो रही है तो क्विक ओवरव्यू:

बिज़नेस लोन्स के टाइप्स

टर्म लोन: फ़िक्स्ड अमाउंट उधार लो, EMIs में फ़िक्स्ड पीरियड (1-7 साल) में वापस करो। इक्विपमेंट ख़रीदने, दुकान बड़ी करने, व्हीकल लेने के लिए।

  • उदाहरण: भंडारी अंकल ने SBI से ₹5 लाख टर्म लोन लिया दुकान रिनोवेट करने के लिए। EMI: ₹11,500/मंथ, 5 साल।

वर्किंग कैपिटल लोन: शॉर्ट-टर्म लोन — डे-टू-डे कैश फ़्लो मैनेज करने के लिए। स्टॉक ख़रीदना, वेजेस देना, ग्राहक पेमेंट्स आने तक ख़र्चे चलाना।

  • उदाहरण: रावत जी हर जून में ₹3 लाख वर्किंग कैपिटल लोन लेते हैं — सीज़नल वर्कर्स और पैकेजिंग के लिए, एपल हार्वेस्ट (अगस्त-सितंबर) से पहले। नवंबर तक प्रोड्यूस बेचकर रीपे कर देते हैं।

मुद्रा लोन (PMMY): गवर्नमेंट-बैक्ड लोन्स — माइक्रो और स्मॉल बिज़नेसेस के लिए। तीन श्रेणियाँ:

  • शिशु: ₹50,000 तक
  • किशोर: ₹50,001 से ₹5 लाख
  • तरुण: ₹5 लाख से ₹10 लाख

कोलैटरल नहीं चाहिए। इंटरेस्ट रेट्स वजहेबल (8-12%)। छोटा बिज़नेस शुरू कर रहे हो या छोटा लोन चाहिए तो मुद्रा अक्सर सबसे अच्छा पहला विकल्प है।

MSME लोन्स (स्टैंड-अप इंडिया, CGTMSE): सरकारी स्कीम्स — लो इंटरेस्ट रेट्स, पार्शियल गारंटीज़ ताकि कोलैटरल न लगे। बैंक या उद्यम पोर्टल गाइड करेगा।

बैंक लोन देने से पहले क्या देखता है

  • बिज़नेस का बैंक स्टेटमेंट (6-12 महीने की हेल्दी ट्रांज़ैक्शन्स)
  • ITR (आमदनी टैक्स रिटर्न्स) — पिछले 2-3 साल
  • CIBIL स्कोर (750+ अच्छा है)
  • कोलैटरल (संपत्ति, FD — मुद्रा के लिए नहीं चाहिए)
  • बिज़नेस विंटेज (कितने साल से चल रहा है)
  • GST रिटर्न्स (अगर एप्लिकेबल)
  • बिज़नेस प्लान (ख़ासकर बड़े लोन्स के लिए)

"जब मुद्रा लोन लागू किया," पुष्पा दीदी बताती हैं, "बैंक ने 6 महीने का बैंक स्टेटमेंट माँगा। शुक्र है अर्जुन ने UPI सेट अप कर दिया था — सब ट्रांज़ैक्शन्स स्टेटमेंट में दिख रहे थे। अगर सब कैश होता, बैंक बोलता 'आपका टर्नओवर दिखता नहीं।' डिजिटल पेमेंट्स ने असलीी लोन दिलवाने में मदद की।"

ओवरड्राफ़्ट (OD) फ़ैसिलिटी

ओवरड्राफ़्ट एक प्री-अप्रूव्ड लोन जैसा है जो करंट अकाउंट से जुड़ा होता है। बैंक अलाउ करता है कि बैलेंस से ज़्यादा पैसा निकालो — एक लिमिट तक।

कैसे काम करता है:

  • करंट अकाउंट में ₹50,000 हैं
  • OD लिमिट ₹2,00,000 है
  • ₹2,50,000 तक विड्रॉ या पे कर सकते हो (बैलेंस + OD लिमिट)
  • इंटरेस्ट सिर्फ़ उतने अमाउंट पर लगता है जो असलीी इस्तेमाल किया, और सिर्फ़ उतने दिनों का

उदाहरण:

भंडारी अंकल का बैंक ऑफ़ बड़ौदा करंट अकाउंट पर ₹3 लाख का OD है। लीन सीज़न (जून-जुलाई) में अकाउंट बैलेंस ₹10,000 तक गिर जाता है लेकिन मानसून कन्स्ट्रक्शन सीज़न के लिए ₹1.5 लाख का स्टॉक चाहिए। OD से ₹1,40,000 इस्तेमाल करते हैं। अगस्त-सितंबर में ग्राहकों पे करते हैं, पैसा वापस आता है, OD बैलेंस ज़ीरो पर।

"इंटरेस्ट सिर्फ़ उतने दिन का लगता है जितने दिन OD इस्तेमाल किया। ₹1.4 लाख, 45 दिन, 11% इंटरेस्ट पर — रफ़्ली ₹1,900। टर्म लोन लेते तो ज़्यादा पेचीदा होता और इंटरेस्ट पूरे साल का।"

OD इंटरेस्ट कैसे गणना होता है:

  • OD इंटरेस्ट रेट: इस्तेमालुअली 10-14% पर एनम
  • इंटरेस्ट डेली गणना होता है आउटस्टैंडिंग अमाउंट पर
  • शॉर्ट-टर्म बिज़नेस फ़ाइनेंसिंग के सबसे सस्ते तरीक़ों में से एक

OD कैसे मिलता है:

  • करंट अकाउंट वाले बैंक में लागू करो
  • बैंक्स इस्तेमालुअली OD कोलैटरल (संपत्ति, FD) या बिज़नेस टर्नओवर के बेसिस पर देते हैं
  • FD के अगेंस्ट OD सबसे आसान — ₹5 लाख FD है तो बैंक ₹4-4.5 लाख OD दे सकता है, FD इंटरेस्ट रेट + 1-2% पर
  • OD एनुअली रिन्यू होता है — बैंक अकाउंट समीक्षा करके तय करता है कन्टिन्यू करना है या नहीं

OD vs लोन — कब क्या इस्तेमाल करें?

सिचुएशनODटर्म लोन
कुछ हफ़्ते/महीनों के लिए पैसा चाहिएहाँज़रूरत से ज़्यादा
एक साल या ज़्यादा के लिएनहीं — महँगा पड़ेगाहाँ
अमाउंट हर महीने बदलती हैहाँफ़्लेक्सिबल नहीं
वन-टाइम बड़ी ख़रीद (इक्विपमेंट, रिनोवेशन)नहींहाँ
सीज़नल कैश फ़्लो गैप्स सँभालनाहाँआइडियल नहीं

स्मॉल बिज़नेसेस की आम बैंकिंग ग़लतियाँ

22 साल में भंडारी अंकल ने इनमें से ज़्यादातर देखी — और कुछ ख़ुद भी की हैं। इनसे सीखो।

1. पर्सनल और बिज़नेस पैसा मिक्स करना

नंबर एक ग़लती। पहले भी बोला, फिर बोलेंगे: अलग रखो। एक करंट अकाउंट बिज़नेस का। एक सेविंग्स अकाउंट पर्सनल। दोनों के बीच पैसा सिर्फ़ सही "ओनर्स ड्रॉइंग" या "कैपिटल इन्फ़्इस्तेमालन" के तौर पर जाए।

2. बैंक स्टेटमेंट चेक नहीं करना

"स्टेटमेंट डाउनलोड करके क्या करूँ? CA को दे देता हूँ।" — ऐसे त्रुटियाँ महीनों तक पकड़ में नहीं आते। अनऑथराइज़्ड चार्जेस, डुप्लिकेट डेबिट्स, नाकाम्ड रिफ़ंड्स — सब सिर्फ़ तब पकड़ में आते हैं जब ख़ुद देखो।

3. इन्सफ़िशिएंट बैलेंस पर चेक इश्यू करना

ऊपर कवर किया। बाउंस्ड चेक क्रिमिनल ऑफ़ेंस है। आपूर्तिकर्ता के साथ रेप्युटेशन ख़त्म, बैंक के साथ क्रेडिट स्कोर ख़राब। कभी चेक इश्यू मत करो जब तक श्योर न हो कि डेट पर पैसे होंगे।

4. मिनिमम बैलेंस बनाए रख नहीं करना

बैंक्स ₹300-600 पर क्वार्टर चार्ज करते हैं मिनिमम बैलेंस ना रखने पर। साल भर में ₹1,200-2,400 — बिना वजह बर्बाद। मिनिमम बैलेंस रिक्वायरमेंट जानो और बनाए रख करो।

5. बैंक चार्जेस इग्नोर करना

बैंक्स बहुत चीज़ों पर चार्ज करते हैं: SMS अलर्ट्स, चेक बुक्स, कैश सँभालनािंग, माँग ड्राफ़्ट्स, अकाउंट स्टेटमेंट्स। छोटे-छोटे चार्जेस जुड़ते हैं। स्टेटमेंट में "CHRGS" या "SC" एंट्रीज़ समीक्षा करो। कुछ चार्जेस नेगोशिएट या वेव हो सकते हैं — ख़ासकर अगर अच्छा एवरेज बैलेंस बनाए रख करते हो।

6. कैश डिपॉज़िट्स बिना सोर्स डॉक्यूमेंटेशन

एक दिन में ₹50,000 या ज़्यादा कैश डिपॉज़िट करो तो बैंक आमदनी टैक्स डिपार्टमेंट को रिपोर्ट करता है। ये सामान्य और लीगल है — लेकिन डॉक्यूमेंटेशन होनी चाहिए कि कैश कहाँ से आया (डेली सेल्स रिकॉर्ड, कैश मेमोज़ वग़ैरह)। बड़ी अनसमझाना्ड कैश डिपॉज़िट्स IT नोटिस ट्रिगर कर सकती हैं।

7. डिजिटल बैंकिंग इस्तेमाल नहीं करना

अगर अभी भी ब्रांच जाकर NEFT कर रहे हो, फ़िज़िकल फ़ॉर्म्स भर रहे हो — हर हफ़्ते घंटों बर्बाद हो रहे हैं। बैंक की ऐप सीखो। एक दोपहर लगेगी सीखने में, सालों तक सैकड़ों घंटे बचेंगे।

8. बिना ज़रूरत लोन लेना

"बैंक ने 10 लाख पेशकश किया तो ले लिया।" ग़लत लॉजिक। लोन्स पर इंटरेस्ट लगता है। सिर्फ़ उतना उधार लो जितना ज़रूरत है, जब ज़रूरत है, साफ़ पर्पस के लिए।

9. बैंक प्रबंधक से रिश्ता नहीं बनाना

ये पुरानी एडवाइस है, लेकिन काम करती है। ब्रांच प्रबंधक को नाम से जानो। कभी-कभी मिलो। अच्छी रिश्ता = फ़ास्टर लोन प्रक्रियािंग, क्विक इश्यू रेज़ोल्यूशन, और कभी-कभी फ़ोन कॉल वॉर्निंग जब अकाउंट में कुछ ग़लत हो।

भंडारी अंकल की एडवाइस: "बैंक प्रबंधक को दिवाली पे मिठाई ज़रूर भेजता हूँ। रिश्तेदारी नहीं — लेकिन एक रिश्ता। जब चेक बुक सिस्टम में दो हफ़्ते अटक गई, एक फ़ोन कॉल में हल हो गया। वरना 'कम्प्लेंट रजिस्टर में लिख दीजिए' का राग सुनना पड़ता।"

डिजिटल बैंकिंग टूल्स और ऐप्स

आज फ़ोन ही बैंक ब्रांच है। हर स्मॉल बिज़नेस ओनर को ये टूल्स पता होने चाहिए:

बैंक ऐप्स

  • SBI YONO — बैलेंस चेक, ट्रांसफ़र, स्टेटमेंट्स, चेक बुक रिक्वेस्ट, लोन लागू, बिल्स पे
  • HDFC मोबाइल बैंकिंग / ICICI iMobile / कोटक 811 — प्राइवेट बैंक ऐप्स, एक्सीलेंट इंटरफ़ेस, फ़ीचर-रिच
  • PNB One — बुनियादी लेकिन काम चलता है

UPI और पेमेंट ऐप्स

  • PhonePe / Google Pay / Paytm — UPI पेमेंट्स रिसीव और सेंड। उत्तराखंड में ज़्यादातर बिज़नेस ओनर्स PhonePe इस्तेमाल करते हैं
  • BharatPe — बिज़नेस-ध्यान्ड। एक QR कोड सब ऐप्स के लिए। स्मॉल बिज़नेस लोन्स भी पेशकश करता है
  • BHIM — गवर्नमेंट की ऑफ़िशियल UPI ऐप। बुनियादी, रिलायबल

अकाउंटिंग-लिंक्ड बैंकिंग

  • Khatabook / OkCredit — डिजिटल उधार प्रबंधन। कौन कितना देना है, कौन कितना लेना है। WhatsApp पर पेमेंट रिमाइंडर्स। बैंक नहीं है लेकिन बैंकिंग के साथ काम करता है
  • Zoho Books / Tally (क्लाउड) — बिज़नेस बढ़ रहा है तो ये सीधे बैंक अकाउंट से कनेक्ट होकर ट्रांज़ैक्शन्स ऑटो-इम्पोर्ट करते हैं
  • Vyapar — GST इनवॉइसिंग ऐप, स्मॉल बिज़नेसेस में पॉपुलर। इनवॉइसेस के अगेंस्ट पेमेंट्स ट्रैक कर सकते हो

गवर्नमेंट पोर्टल्स

  • उद्यम रजिस्ट्रेशन (udyamregistration.gov.in) — फ़्री MSME रजिस्ट्रेशन। बैंक लोन्स और गवर्नमेंट स्कीम्स के लिए ज़रूरी
  • CIBIL (cibil.com) — क्रेडिट स्कोर चेक करो। हर एडल्ट को साल में एक बार चेक करना चाहिए। साल में एक बार फ़्री है
  • TReDS — बड़ी कंपनीज़ को आपूर्ति करते हो तो इनवॉइसेस फ़ाइनेंस करवा सकते हो। बिज़नेस बढ़े तो रेलेवेंट है

डिजिटल बैंकिंग सिक्योरिटी टिप्स

  1. कभी OTP किसी को मत बताओ। बैंक को नहीं, "ग्राहक केयर" को नहीं, किसी को भी नहीं जो कॉल करके बोले अकाउंट में समस्या है। बैंक्स कभी फ़ोन पर OTP नहीं माँगते।
  2. फ़ोन पर स्क्रीन लॉक रखो। फ़ोन चोरी हो और अनलॉक्ड हो तो मिनट्स में अकाउंट ख़ाली।
  3. टू-फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन इनेबल करो बैंकिंग ऐप्स पर।
  4. SMS या WhatsApp में बैंक के नाम से आए लिंक्स पर क्लिक मत करो। हमेशा ऑफ़िशियल ऐप सीधे खोलो।
  5. ट्रांज़ैक्शन लिमिट्स सेट करो UPI और डेबिट कार्ड पर। ज़रूरत हो तो बढ़ाओ, बाद में कम करो।
  6. SMS अलर्ट्स मॉनिटर करो। ऐसी ट्रांज़ैक्शन अलर्ट आए जो ऑथराइज़ नहीं की — तुरंत बैंक कॉल करो। अनऑथराइज़्ड ट्रांज़ैक्शन्स रिपोर्ट करने की विंडो लिमिटेड होती है (इस्तेमालुअली 3-7 दिन)।

नीमा को कॉल आया: "मैडम, आपका SBI अकाउंट ब्लॉक हो जाएगा। OTP शेयर करें वेरिफ़ाई करने के लिए।" देने ही वाली थीं। फिर याद आया — बैंक ब्रांच तो मुनस्यारी में ही है। चलकर पूछा। ब्रांच प्रबंधक बोले, "ये स्कैम है। हम कभी कॉल करके OTP नहीं माँगते। आप सही किया यहाँ आकर।"

सब मिलाकर — भंडारी अंकल की बैंकिंग क्लीनअप

मिश्रा जी की एडवाइस के 6 महीने बाद, भंडारी अंकल की बैंकिंग बदल गई:

करंट अकाउंट (बैंक ऑफ़ बड़ौदा): सब बिज़नेस ट्रांज़ैक्शन्स। UPI यहीं लिंक्ड। सब आपूर्तिकर्ता पेमेंट्स NEFT से यहीं से। सब ग्राहक पेमेंट्स — UPI, चेक्स, NEFT — यहीं आते हैं। GST और टैक्स पेमेंट्स यहीं से। ₹3 लाख OD फ़ैसिलिटी अटैच्ड।

सेविंग्स अकाउंट (SBI): पर्सनल और फ़ैमिली इस्तेमाल ओनली। हर महीने 1 तारीख़ को करंट अकाउंट से ₹40,000 ओनर्स ड्रॉइंग ट्रांसफ़र — NEFT से।

FD (बैंक ऑफ़ बड़ौदा): ₹5 लाख — इमरजेंसी रिज़र्व और OD कोलैटरल।

जन धन अकाउंट: गवर्नमेंट सब्सिडी लिंकेज के लिए ओपन। कोई बिज़नेस ट्रांज़ैक्शन्स नहीं।

PNB सेविंग्स: बंद।

हर संडे 20 मिनट — हफ़्ते की UPI ट्रांज़ैक्शन्स BharatPe पर समीक्षा, बिलिंग रजिस्टर से मैच। महीने में एक बार बैंक ऑफ़ बड़ौदा स्टेटमेंट डाउनलोड करके मिश्रा जी को देना।

"पहले चार अकाउंट्स में पैसा घूमता था, कुछ समझ नहीं आता था। अब एक ही अकाउंट देखना है। CA ख़ुश, वाइफ़ ख़ुश, टैक्स फ़ाइलिंग आसान। शुरू में थोड़ा एफ़र्ट लगा, लेकिन अब बहुत सिंपल है।"

चैप्टर चेकलिस्ट

आगे बढ़ने से पहले ये करो (या प्लान करो):

  • बिज़नेस के लिए करंट अकाउंट खोला (या तय किया कब खोलेंगे)
  • पर्सनल और बिज़नेस बैंकिंग पूरी तरह अलग की
  • बिज़नेस UPI/मर्चेंट QR कोड सेट अप किया
  • अपनी जगह और नीड्स के लिए सही बैंक आइडेंटिफ़ाई किया
  • बैंक स्टेटमेंट डाउनलोड और पढ़ना सीखा
  • बुनियादी रिकन्सिलिएशन हैबिट शुरू की (वीकली या मंथली)
  • नियमित आपूर्तिकर्ता/रेसिपिएंट्स को NEFT बेनिफ़िशियरीज़ में सेव किया
  • बैंकिंग ऐप्स पर सिक्योरिटी मेज़र्स सेट अप किए (स्क्रीन लॉक, OTP अवेयरनेस, ट्रांज़ैक्शन लिमिट्स)
  • CIBIL स्कोर कम से कम एक बार चेक किया

अगले चैप्टर में बिज़नेस फ़ंडिंग डीटेल में — पैसा कहाँ से आता है बिज़नेस शुरू करने और बढ़ाने के लिए। लोन्स, गवर्नमेंट स्कीम्स, एंजल निवेशक, बूटस्ट्रैपिंग — और कौनसा विकल्प किसके लिए सही है। रावत जी को कोल्ड स्टोरेज यूनिट के लिए ₹8 लाख चाहिए। अंकिता दो लोग हायर करके D2C ब्रांड स्केल करना चाहती हैं। विक्रम दूसरा फ़्रेंचाइज़ी आउटलेट सोच रहा है। एक ही सवाल, अलग-अलग जवाब।